प्रौढ़ शिक्षा पर भाषण

Adult Education Speech in Hindi

प्रौढ़ शिक्षा पर भाषण : Adult Education Speech in Hindi:- आज के इस लेख में हमनें ‘प्रौढ़ शिक्षा पर भाषण’ से सम्बंधित जानकारी प्रदान की है।

यदि आप प्रौढ़ शिक्षा पर भाषण से सम्बंधित जानकारी खोज रहे है? तो इस लेख को शुरुआत से अंत तक अवश्य पढ़े। तो चलिए शुरू करते है:-

प्रौढ़ शिक्षा पर भाषण : Adult Education Speech in Hindi

सुप्रभात, आदरणीय प्रधानाचार्य जी, माननीय शिक्षकगण एवं मेरे प्यारे साथियों, आप सभी को मेरा प्यारभरा नमस्कार।

मेरा नाम —– है और मैं इस विद्यालय में 11वीं कक्षा का विद्यार्थी हूँ। आज मैं इस शुभ अवसर पर आप सभी के सामने एक छोटा सा भाषाण प्रस्तुत करने जा रहा हूँ, जिसका विषय है:- प्रौढ़ शिक्षा।

यह एक काफी महत्वपूर्ण विषय है। सर्वप्रथम मैं आप सभी को धन्यवाद देना चाहता हूँ कि आप सभी ने मुझे इस मंच पर अपने विचार व्यक्त करने का अवसर प्रदान किया।

आज मैं प्रौढ़ शिक्षा पर दो शब्द कहना चाहता हूँ। आशा करता हूँ कि आपको मेरे द्वारा कहे गए शब्द अवश्य ही पसंद आयेंगे। शिक्षा का अर्थ होता है अच्छा आचरण, विद्या व उचित तकनीक को प्राप्त करने का माध्यम।

किसी भी व्यक्ति को अपना जीवनयापन करने के लिए जिन भी वस्तुओं की आवश्यकता होती है, वें सभी कहीं न कहीं शिक्षा से जुड़ी होती है।

शिक्षा पर कभी भी किसी एक वर्ग का अधिकार नहीं होता है। इसे हर आयु वर्ग को दी जानी चाहिए।

कईं बार आपने सुना होगा कि कईं लोग अपने से बड़े लोगों को या बूढ़े लोगों को कहते है कि अब आपको शिक्षा की क्या आवश्यकता है। शिक्षा तो सिर्फ बच्चों के लिए ही होती है।

लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है, शिक्षा हर वर्ग के लोगों के लिए आवश्यक है। शिक्षा कभी भी आयु, वर्ग, जाति व धर्म को देखकर नहीं दी जानी चाहिए।

क्योंकि, हर व्यक्ति को शिक्षा का अधिकार है। हमारा संविधान भी भारत के हर नागरिक को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करता है।

उससे यह अधिकार कोई भी नहीं छिन सकता है। जीवन का अर्थ ही होता है:- सीखते रहना। शिक्षा को सम्पूर्ण जीवनभर भी जारी रखा जा सकता है।

किसी भी देश के विकास के लिए उसके हर वर्ग का शिक्षित होना अतिआवश्यक है। भारत जैसे लोकतान्त्रिक देश में हर वर्ग को शिक्षा प्राप्त होना आवश्यक है।

क्योंकि यदि सभी लोग जो प्रौढ़ वर्ग से है, वो शिक्षित होंगे तो वह देश का नेतृत्व सही हाथों में दे सकते है और अपने अधिकारों के लिए भी लड़ सकते है।

जैसे कि आप देख सकते है कि आजकल कईं बार सरकार गलत फैसले ले लेती है या फिर कुछ लोग उसे गलत तरीके से दिखाते है।

यदि सभी लोग शिक्षित होंगे, तो वह सही फैसले में सरकार का साथ दे सकेंगे और फैसला गलत होने पर सरकार का विरोध कर पाएंगे।

प्रौढ़ लोग हमारे समाज के वह लोग होते है, जिनके पास जीवन का बहुत अधिक अनुभव होता है। यदि वह सभी शिक्षित होंगे, तो वह आने वाली पीढ़ी से अपने अनुभव को सही प्रकार से साझा कर पाएंगे।

कईं बार लोग उन्हें अशिक्षित समझकर उनसे कुछ भी पूछने में कतराते है। प्रौढ़ की शिक्षा से आने वाली पीढ़ी भी शिक्षित होगी।

आज भी गाँवों व कईं इलाकों में लोग धर्म व जाति के बारे में सोचते है, जो काफी हद तक गलत बात है। महिलाओं के प्रति असमानता व कईं अंधविश्वास समाज में फैले हुए है।

प्रौढ़ शिक्षा के माध्यम से हम इन सभी को रोक सकते है व इन्हें आने वाली पीढ़ी में पहुंचने से भी रोका जा सकता है।

शिक्षा किसी भी व्यक्ति के मानसिक विकास के साथ उनकी रूचि, दक्षता व क्षमता को बढ़ाता है और इसके अनुसार व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी व कर्तव्य को पूरा करता है।

कुल मिलाकर कहें तो शिक्षा एक व्यक्ति को योग्य व जिम्मेदार नागरिक बनाती है, जो कि देश के विकास में सहयोग दे सकते है।

कईं बार यह पाया गया है कि कम साक्षरता रखने वाले देशों का विकास नहीं हो पाता है या धीरे होता है और आए दिन उस देश को विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

इस बात को देखते हुए प्रौढ़ शिक्षा का महत्व ओर अधिक बढ़ जाता है। अंत में मैं अपने भाषण को समाप्त करने जा रहा हूँ।

धन्यवाद!

अंतिम शब्द

अंत में आशा करता हूँ कि यह लेख आपको पसंद आया होगा और आपको हमारे द्वारा इस लेख में प्रदान की गई अमूल्य जानकारी फायदेमंद साबित हुई होगी।

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