भाई दूज 2022 तिथि, शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा

Bhai Dooj in Hindi

Bhai Dooj 2022 Date in Hindi:- आज के इस लेख में हमनें Bhai Dooj 2022 Date प्रदान की है।

यदि आप भाई दूज के बारे जानकारी खोज रहे है, तो इस लेख को शुरुआत से अंत तक अवश्य पढ़े। तो चलिए शुरू करते है:-

Bhai Dooj 2021 : भाई दूज 2021 तिथि, शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा

जैसा कि आप जानते है कि भारत त्योहारों का देश है। जहाँ पर विभिन्न प्रकार के त्योंहार मनाये जाते है। इन्हीं में से एक त्यौहार ‘भाई दूज’ है।

भाई-बहन का रिश्ता एक ऐसा रिश्ता है, जो काफी नाजुक होता है। जहाँ दोनों एक-दूसरे के साथ सही से रह भी नहीं सकते है और एक-दूसरे के बिना भी नहीं रह सकते है।

यह रिश्ता बहुत ही खट्टा-मीठा होता है। यह त्यौहार रक्षाबंधन की तरह ही मनाया जाता है। भाई दूज से जुड़े सभी सवाल आपको यहाँ ले आये है।

इस लेख में आपको अपने सभी प्रश्नों के उत्तर प्राप्त हो जायेंगे। तो चलिए शुरू करते है:-

भाई दूज का त्यौहार कब मनाया जाता है?

भाई दूज का त्यौहार प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि के दिन मनाया जाता है।

इसे प्रत्येक वर्ष दीपावली के 2 दिन बाद मनाया जाता है। यह त्यौहार भाई और बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाता है।

भाई दूज का त्यौहार कैसे मनाया जाता है?

इस दिन बहनें अपने भाइयों की लम्बी उम्र के लिए प्रार्थना करती है। इस दिन दोनों भाई-बहन स्नान करने के बाद मिलकर यमराज, चित्रगुप्त व यम के दूतों की पूजा करते है।

उसके बाद बहन अपने भाइयों को चावल के साथ घी का तिलक लगाती है। बहनें अपनी पूजा की थाली में फल-फूल, मिठाई, सुपारी, अक्षत व दीपक जलाती है।

उसके बाद भाई की हथेली पर पान, सुपारी, सिंदूर व नारियल रखती है। उसके बाद अपने भाई की आरती करती है और भाई की कलाई में रोली बांधकर उसे मिठाई और पान खिलाती है।

उसके बाद भाई अपनी बहन को सदैव उसकी रक्षा करने का वचन देता है और उसे कोई उपहार देता है।

भाई दूज का त्यौहार क्यों मनाया जाता है

भाई दूज का त्यौहार मनाने की 2 कथाएँ प्रचलित है। जिनमें से एक पौराणिक कथा और दूसरी लोक कथा है। पहले हम आपको पौराणिक कथा के बारे में बताते है।

पौराणिक कथा के अनुसार सूर्य देव और उनकी पत्नी संज्ञा की 2 संतान थी। जिनमें से एक पुत्र था, जिसका नाम यम और दूसरी पुत्री थी, जिसका नाम यमुना था।

संज्ञा कभी सूर्य देव का तेज सहन नहीं कर पाती थी। इसलिए उसने एक दिन अपनी परछाई उत्पन की और अपनी संतानों को अपनी छाया के साथ छोड़कर वहाँ से चली गई।

भाई-बहनों में बहुत ही प्रेम था। कुछ समय बाद यमुना का विवाह हो गया। यमुना सदैव ही अपने भाई को खाने पर बुलाती थी। लेकिन यम कार्यों में व्यस्त होने के कारण वह अपनी बहन को मिलने नहीं जा पाते थे।

एक दिन यम कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि के दिन अपनी बहन से मिलने पहुंचे और अपने भाई को देखकर यमुना बहुत ही प्रसन्न हुई।

उसने अपने भाई का आदर-सत्कार किया और उसे भोजन कराया। इससे प्रसन्न होकर यम ने अपने बहन को एक वरदान मांगने को कहा।

जिसके बाद यमुना ने उनसे यह वर माँगा कि आप प्रत्येक वर्ष इसी दिन मुझसे मिलने जरूर आयेंगे। मेरी तरह जो भी बहनें अपनी भाई का टिका इस दिन करे उसे तुम्हारा भय न रहे।

यमराज ने अपनी बहन को यह वर दे दिया और धन-धान्य देकर वापस यमलोक चले गए।

इसके बाद से ही इस दिन भाई अपनी बहन के बुलावे पर उसके घर जाते है और टीका करवाते है। जिससे उस पर यमराज का किसी भी प्रकार का खतरा नहीं रहता है।

अब आपको लोक कथा के बारे में बताते है। लोक कथा के अनुसार एक वृद्ध महिला थी। जिसका एक बेटा और एक बेटी थी। बेटी बेटे से बड़ी थी।

बेटी की शादी होने के बाद एक दिन भाई ने अपनी बहन से मिलने जाने के बारे में सोचा। तब माँ ने कहा कि तेरी बहन का व्यवहार तेरे प्रति बड़ा ही रुखा है और वह हमेशा ही तुझसे लड़ती रहती है।

इसलिए तुझे उससे मिलने नहीं जाना चाहिए। लेकिन बेटा नहीं माना और जाने की हठ करने लगा। तब माँ ने उसे जाने दिया।

लेकिन जब वह घर से निकला तो उसे कई चुनोतियों का सामना करना पड़ा। सबसे पहले उसे अपने रास्ते में एक नदी मिली और नदी ने कहा कि मैं तेरे रास्ते में तेरा काल बनकर आई हूँ।

तुझे मेरे अंदर समाना होगा। तब भाई ने उसे कहा कि मैं कईं वर्षों बाद अपनी बहन से मिलने जा रहा हूँ। जब मैं वापस आऊंगा, तब तुम मुझे अपने अंदर डूबा देना।

तब नदी उसे आगे बढ़ने देती है। उसके बाद उसे रास्ते में एक सांप मिलता है। जो उससे कहता है कि मैं तेरा काल हूँ और मैं तुझे डसूंगा।

भाई ने अपनी पुरानी बात को दोहराते हुए कहा कि मैं अपनी बहन से मिलने जा रहा हूँ। जब मैं वापस आऊंगा तब मैं अपने प्राणों का त्याग कर दूंगा।

यह सुनकर सांप ने उसे जाने दिया। आगे जाने पर भाई को एक शेर रोकता है और वह उस पर हमला करने लगता है।

तब भाई ने शेर से कहा कि मैं एक बार अपनी बहन से मिल लूं तब मैं अपने प्राण ख़ुशी-ख़ुशी दे दूंगा। उसकी बात सुनकर शेर ने भी उसे जाने दिया।

अंत में भाई अपनी बहन के दरवाजे पर पहुँचा और अपनी बहन को दरवाजे से ही आवाज लगाई। बहन सूत कात रही थी। तभी उसका सूत टूट गया।

एक पुरानी मान्यता के अनुसार बहन अपने भाई से तब तक बात नहीं कर सकती, जब तक सूत दुबारा न जुड़ जाए वरना भाई पर संकट आता है।

इसलिए भाई की आवाज सुनने के बाद भी बहन ने उसको अनदेखा कर दिया। यह सब देखकर भाई को बड़ा ही दुःख हुआ और उसने सोचा कि मैं गरीब हूँ।

इसलिए मेरी बहन मुझसे बात नहीं कर रही है। शायद माँ सही ही कह रही थी। मुझे यहाँ नहीं आना चाहिए था। यह सोच कर भाई वापस जाने लगा।

उसी वक्त बहन का सूत जुड़ गया और बहन भागते हुए भाई से मिलने आई और अपने जल्दी न आने का कारण बताया।

उसके बाद वह अपने भाई को बड़े प्यार से घर ले गई और उसे वहाँ बिठाकर पड़ोस में एक सहेली के पास गई और उससे जाकर पूछा कि यदि आपके घर में कोई आपके प्राणों से भी प्यारा आ जाए तो आपको क्या करना चाहिए?

तब सहेली ने मजाक में कह दिया कि तेल से चौका लीपना चाहिए और घी में चावल पकाने चाहिए।

लेकिन बहन यह नहीं समझ पाई कि सहेली मजाक कर रही है और उसने घर जाकर उसके कहने के अनुसार ही काम किया।

लेकिन थोड़ी देर बाद उसने देखा कि न तो चौका सूखा और न ही चावल पके। तब बहन ने अपनी दूसरी सहेली के पास जाकर अपनी परेशानी बताई।

तब उसकी सहेली ने समझाया की तेल से लीपी हुई रसोई कभी नहीं सूखती और घी में कभी चावल नहीं पकते है।

इन दोनों के लिए पानी का ही प्रयोग करों। बहन तुरंत जाकर पानी से ही चौका लगाती है और पानी में ही चावल पकाती है।

तब बहन अपने भाई को बड़े ही प्यार से भोजन परोसती है। इसी प्रकार से दोनों भाई-बहन ने कईं दिन साथ में बिताये।

एक दिन भाई ने वापस जाने की इच्छा जताई और अगले ही दिन जाने का फैसला किया। अगले दिन बहन ने जल्दी उठकर गेंहू पीसे और अपने भाई के लिए लड्डू बनाये।

जैसे ही भाई जाने लगा तब बहन ने भाई को लड्डू दे दिए और उन्हीं लड्डुओं में से कुछ लड्डू बहन ने अपने बच्चों के लिए भी रख दिए।

जब बहन ने लड्डू अपने बच्चों को दिए तो उसने देखा कि लड्डुओं का रंग हरा हो गया है। बहन ने तुरंत जाकर चक्की को देखा और पाया कि गेंहू के साथ एक सांप भी पीस गया है।

यह देखकर बहन बहुत घबरागई और उसने सोचा कि यदि भाई ने यह लड्डू खा लिया तो वह मर जाएगा।

यह सोचकर बहन अपने भाई के पीछे भागी और उसे भाई एक पेड़ के नीचे बैठा हुआ मिला। उसने तुरंत जाकर भाई को लड्डूओं के बारे में पूछा और भाई ने वह लड्डू निकल कर बहन को दे दिए।

बहन ने वह लड्डू जमीन में गाड़ दिए और भाई को सारी बात बताई। तब भाई ने बहन को कहा कि तूने मुझे इस बार तो बचा लिया।

लेकिन जब में तुझसे मिलने आ रहा था, तो मुझे कईं रूपों में मेरा काल मिला और मैंने हर बार यह कहा कि जब मैं अपनी बहन से मिलकर आ जाऊं तो तब मेरे प्राण ले लेना।

इतने में बहन को प्यास लग गई। तब भाई ने कहा कि तू यहीं रूक। मैं पास की नदी से पानी लेकर आता हूँ।

लेकिन बहन ने कहा कि मैं खुद ही जाकर पी लुंगी और जैसे ही बहन नदी के पास गई तो उसने देखा कि एक बूढ़ी औरत नदी किनारे बैठी है।

तब बहन ने उससे पूछा कि माँ तुम यहाँ क्यों बैठी हो। तब बूढ़ी औरत ने कहा कि मैं विधाता हूँ और मैं एक बहन के भाई की प्रतीक्षा कर रही हूँ।

तब बहन ने पूछा कि वह भाई कौन है? तब विधाता ने कहा कि एक भाई जिसके प्रेम के कारण बहन ने एक सांप की हत्या कर दी।

यह सुनकर बहन तुरंत समझ गई कि विधाता तो मेरे ही भाई की बात कर रही है। तब बहन ने उससे पूछा कि उस बहन को अपने भाई को बचाने के लिए क्या करना चाहिए?

तब उसने उसे बताया कि यदि बहन अपने भाई को गालियाँ दे और उसकी शादी होने तक उसे सभी परेशानियों से बचा ले तो उसका काल टल जाएगा।

बहन अपने भाई के पास वापस गई और उससे कहा की मैं तुझे घर तक छोड़ने खुद चलूंगी। मैं बस थोड़ी देर में आती हूँ, तू मेरा यही पर इंतजार करना।

यह कहकर बहन जल्दी से घर गई और शेर के लिए मास, सांप के लिए दूध और नदी के लिए ओढ़नी लेकर आई और भाई को लेकर घर की और चल दी।

रास्ते में उन्हें शेर मिला और बहन ने शेर के सामने मांस का टुकड़ा डाल दिया। जिससे शेर का ध्यान मांस के टुकड़े पर चला गया और वह दोनों वहाँ से निकल गए।

आगे जाकर उन्हें सांप मिला और सांप जैसे ही भाई को डंसने के लिए आगे बढ़ता है।

बहन उसके सामने दूध रख देती है और सांप दूध पीने लगता है और अंत में नदी के पास जाकर बहन नदी को चुनरी अर्पित कर देती है।

जिससे नदी खुश हो जाती है और उन्हें जाने का रास्ता दे देती है। जैसे ही वह घर पहुंचते है। बहन-भाई को गालियाँ देने लगती है।

यह देखकर माँ अपने बेटे को कहती है कि तू इसे यहाँ क्यों लाया है? तब भाई ने कहा कि माँ बहन तो बहुत अच्छी थी।

पता नहीं उसे यहाँ आकर क्या हो गया? कुछ दिनों के बाद भाई के लिए रिश्ता आता है और शादी निश्चित होने पर भाई के ससुराल वाले मिठाई लेकर आए।

तब बहन ने कहा कि तुम इसकी मिठाई क्यों बाँट रहे हो? पहले मेरी मिठाई बाँटो। वहाँ उपस्थित लोगों ने उसे भाई के साथ बैठने के लिए कहा और इसके कुछ समय बाद ही सगाई की रश्म शुरू होती है।

लेकिन रश्म शुरू होते ही वहाँ आग लग गई। बहन को पहले ही पता था कि उसके भाई पर विपदाए आएगी और अगर वह उन्हें टाल देगी तो उसके भाई की मृत्यु टल जाएगी।

इसलिए वह पहले ही सतर्क थी और उसने जल्दी से आग को बुझा दिया। सगाई से लेकर शादी तक बहन भाई के साथ ही थी।

बारात की निकासी के समय भी बहन ने कहा की इसकी निकासी से पहले मेरी निकासी करों और उसने भाई को पीछे के दरवाजे से ले जाने के लिए कहा।

जैसे ही भाई को पीछे के दरवाजे से ले जाया गया। उसी वक्त आगे वाला दरवाजा टूट गया। सभी लोग समझ गए थे कि बहन ने भाई की जान बचाने के लिए ऐसा किया।

इसके बाद बहन फेरों के समय भी भाई के साथ ही रही और विवाह के बाद जब नव-दम्पति की रात जगती है तो बहन ने कहा की पहले मेरी रात जगाओ।

सारे अतिथि समझ गए थे कि ऐसा करने के पीछे भी बहन का कोई मकसद है। वह अवश्य ही अपने भाई की जान बचाने के लिए ऐसा कर रही है।

लोगों ने कहा कि इसे भी पर्दा लगाकर उसी कमरे में सुला दो। रात में नव-दाम्पत्य के सो जाने के बाद वहाँ पर एक सांप आता है और बहन उस सांप को पकड़ कर टोकरी में बंद कर देती है।

अंतत: वह बहुत दिन बाद चेन की नीद सोती है। सुबह होने पर माँ कमरे में आई और उसे सोता देखकर माँ ने सोचा कि इसके उठने से पहले मैं मेहमानों की विदाई कर देती हूँ।

वरना यह शोर मचाकर मुझे फिर से शर्मिंदा कर देगी। जब बेटी उठी तो उसने देखा कि घर में कोई नहीं है। तो उसने माँ से पूछा कि सारे मेहमान कहाँ गए?

तब माँ ने उत्तर दिया की मैंने सारे मेहमानों को विदा कर दिया। यह सुनकर बहन ने कहा कि सारे मेहमानों को वापस बुला लो और जब सभी मेहमान आ जायेंगे, मैं तभी विदा कर दूँगी।

उसके कहने के अनुसार माँ ने सभी मेहमानों को वापस बुला लिया। तब उसने अपनी माँ से कहा कि माँ मुझे क्षमा कर देना।

मेरे भाई पर संकट था, इसलिए ही मेरा व्यवहार ऐसा था और उसने विधाता से हुए अपने वार्तालाप के बारे मे भी बताया।

यह सुनकर माँ और भाई दोनों ही बहुत भावुक और प्रश्न हुए और उसको बड़े ही प्यार से सभी मेहमानों के सामने विदा किया।

  1. 2022 में भाई दूज कब है?

    2022 में भाई दूज 26 अक्टूबर के दिन है।

भाई दूज की हार्दिक शुभकामनाएँ

बहिन चाहे भाई का प्यार
नहीं चाहे महंगे उपहार
रिश्ता अटूट रहे सदियों तक
मिले मेरे भाई को खुशिया अपार
हैप्पी भाई दूज

दिल की यह कामना है
कि आपकी ज़िंदगी
खुशियों से भरी हो
सफलता आपके कदम चूमें
और हमारा यह बंधन
सदा ही प्यार से भरा रहे
भाई दूज की शुभकामनाएं

रूठकर तू क्यों बैठा है भाई, अब मुझसे बात कर
हो गई गलती मुझसे, अब अपनी बहन को माफ कर
बिन तुझसे बात किए कैसे कटेगा वक्त मेरा
देख फलक की ओर चांद की तन्हाई एहसास कर..!

खुशनसीब होती है वो बहन जिसे भाई का प्यार मिलता है,
खुशनसीब होते हैं लोग जिन्हें यह संसार मिलता है।
भाई दूज के त्यौहार की सभी को शुभ कामनायें!

सूरज की किरणे खुशियों की बहार,
चाँद की चाँदनी अपनों का प्यार,
बधाई हो आपको भाई दूज का त्यौहार।

लाल गुलाबी रंग है, झूम रहा संसार,
सूरज की किरणें, खुशियों की बहार,
चांद की चांदनी, अपनों का प्यार,
बधाई हो आपको, भैया दूज का त्योहार!!
हैप्पी भाई-दूज

भाई तेरे मेरे प्यार का बंधन,
प्रेम और विश्वास का बंधन,
तेरे माथे पर लगाऊ चंदन,
मांगु दुआएं तेरे लिए हर पल।
हैप्पी भाई दूज

भाई दूज की शुभ अवसर पर,
मैं दुआ मांगती हूं,
सारे संसार में उसका ऊंचा नाम हो,
जीवन की हर पल में खुशियों की बहार हो।
हैप्पी भाई दूज

बहन चाहे भाई का विश्वास,
भाई चाहे बहन का प्यार,
रिश्ता है ये ऐसा जैसे नदी और सागर,
यूं ही बना रहे यह भाई बहन का अटूट रिश्ता।
Happy Bhai Dooj..!

एक बहन का प्यार
भाई के लिए सबसे बड़ी दौलत होती है,
सब कुछ खर्च हो जाता है लेकिन
प्यार के वो खजाने याद रहते है।
हैप्पी भाई दूज..!!

अंतिम शब्द

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