पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध

Essay on Environment Pollution in Hindi

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध : Essay on Environment Pollution in Hindi:- आज के इस लेख में हमनें ‘पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध’ से सम्बंधित जानकारी प्रदान की है।

यदि आप पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध से सम्बंधित जानकारी खोज रहे है? तो इस लेख को शुरुआत से अंत तक अवश्य पढ़े। तो चलिए शुरू करते है:-

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध : Essay on Environment Pollution in Hindi

प्रस्तावना:-

पृथ्वी पर जीवन का एक महत्वपूर्ण कारण पर्यावरण है। इसी से ही इस पृथ्वी के सभी जीवों का जीवन है। यह प्रकृति हमें जीवन प्रदान करती है, लेकिन मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए इस प्रकृति को बर्बाद करने पर लगा है।

दिन-प्रतिदिन यह प्रकृति प्रदूषित होती जा रही है, लेकिन इसे बचाने वाला कोई नहीं है। मुख्य रूप से यह पर्यावरण तीन प्रकार से प्रदूषित होता है:- वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण एवं मृदा प्रदूषण।

यें प्रदूषण इस प्रकृति को काफी नुकसान पहुँचा रहे है। पृथ्वी पर फ़ैल रहे सभी प्रकार के प्रदुषण मनुष्य की ही देन है।

पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार:-

यह पृथ्वी पर मौजूद प्रदूषण के सभी प्रकार निम्नलिखित है:-

  • वायु प्रदूषण:-

वायु में जो प्रदूषण फैला होता है, उसे ही वायु प्रदूषण कहते है। कारखानों से निकलने वाले धुएं, वाहनों से निकलने वाले धुएं एवं मनुष्यों द्वारा उपयोग में ली जाने वाली कईं वस्तुएँ है, जो वायु को प्रदूषित करती है।

वायु प्रदूषण इस पृथ्वी पर मौजूद सभी प्रकार के जीवों के लिए हानिकारक है। इससे श्वास संबंधी बीमारियाँ होती है। वायु प्रदूषण से तापमान में भी वृद्धि होती है।

  • जल प्रदूषण:-

जल का अशुद्ध होना ही जल प्रदूषण होता है। वर्तमान समय में नदियाँ और तालाब काफी अधिक प्रदूषित हो गए है। कारखानों से निकलने वाले गंदे पानी, घरों से निकलने वाले पानी व पानी में कूड़ा-कचरा डालने से भी जल प्रदूषण होता है।

इससे मनुष्य को भी कईं प्रकार की बीमारियाँ होती है। इस पानी का उपयोग करने से मनुष्य को त्वचा एवं पेट संबंधी बीमारियाँ भी होती है।

  • मृदा प्रदूषण:-

जब मिट्टी में रसायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल किया जाता है, तो यें उर्वरक मृदा को प्रदूषित करते है। मृदा के प्रदूषण से मनुष्य को विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ होती है। इससे भोजन भी प्रदूषित होता है और मनुष्य को नुकसान पहुँचता है।

प्रदूषण के कारण:-

  • वाहनों का उपयोग:- वाहनों से निकलने वाले धुएं से वायु प्रदूषण होता है। इससे निकलने वाले धुएं में कार्बन-डाई-ऑक्साइड होता है, जो इस प्रकृति को नुकसान पहुँचाता है। वाहनों के बढ़ने से वायु प्रदूषण भी बढ़ता ही चला जा रहा है।
  • कारखानों से:- कारखानों से निकलने वाले गंदे पानी व धुएं से भी यह पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। इससे निकलने वाला धुँआ वायुमंडल को प्रदूषित करता है और इससे निकलने वाला गंदा पानी जल प्रदूषण करता है। यें कारखाने इस पर्यावरण को काफी प्रदूषित करते है।
  • पेड़ों की कटाई:- पेड़ों की कटाई भी प्रदूषण बढ़ने का एक महत्वपूर्ण कारण है। वायुमंडल में जो कार्बन-डाई-ऑक्साइड होता है, उसे पेड़ श्वास के रूप में ग्रहण कर हमें ऑक्सीजन प्रदान करते है, जो मनुष्य के जीवन के लिए काफी आवश्यक होती है। पेड़ इस प्रकृति में संतुलन बनाने का काम करते है।
  • प्लास्टिक का उपयोग:- प्लास्टिक की थैलियाँ इस पर्यावरण के लिए काफी हानिकारक होती है। यें प्लास्टिक की थैलियाँ जलने पर वायु को प्रदूषित करती है और जल में विलीन होने पर जल को भी प्रदूषित करती है एवं जब मिट्टी में दब जाती है, तो मृदा प्रदूषण करती है। यें पर्यावरण को काफी तरह से प्रदूषित करती है।
  • ग्रीन हाउस गैसें:- ग्रीन हाउस गैसें मनुष्य द्वारा उपयोग में ली जाने वाली कईं प्रकार की वस्तुओं से उत्पन्न होती है। यें हमारे पर्यावरण के लिए काफी घातक होती है। यें गैसें ओजोन परत को नुकसान पहुँचाती है। ओजोन परत सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों को पृथ्वी पर आने से रोकती है। यें किरणें मनुष्य के लिए हानिकारक होती है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुँचाती है।

पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के उपाय:-

  • पेड़-पौधें लगाना:- हमें अधिक से अधिक संख्या में पेड़-पौधे लगाने चाहिए। यें ही इस प्रकृति को बचा सकते है। पेड़-पौधें इस प्रकृति में संतुलन बनाने का कार्य करते है। यें सभी जीव-जन्तुओं को जीवन के लिए ऑक्सीजन प्रदान करते है।
  • जल को साफ-सुथरा रखना:- हमें नदियों व तालाबों को साफ-सुथरा रखना चाहिए और इसमें प्लास्टिक की थैलियों को नहीं डालना चाहिए। हमें समय-समय पर इनकी सफाई करनी चाहिए।
  • प्लास्टिक का सीमित उपयोग:- हमें प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग नहीं करना चाहिए या फिर जितना हो सके उतना कम उपयोग करना चाहिए। हमें सामान लाने के लिए कपडे की थैलियों का ही उपयोग करना चाहिए।
  • वाहनों का सीमित उपयोग:- हमें जितना हो सके उतना ही कम वाहनों का उपयोग करना चाहिए। हमें अपने निजी वाहनों का उपयोग कम करके सार्वजनिक वाहनों का उपयोग अधिक करना चाहिए।
  • कारखानों को शहरों से दूर स्थापित करना:- कारखानों को इंसानी बस्तियों और नदियों से दूर ही स्थापित करना चाहिए, जिससे यें इंसानो को अधिक प्रभावित नही करें और नदियों को भी प्रदूषित नहीं करें।

उपसंहार:-

यह पर्यावरण हमें ईश्वर का दिया हुआ वरदान है, जिसका हमें ध्यान रखना चाहिए। यह प्रकृति सुंदरता के साथ-साथ हमें जीने के लिए प्रत्येक आवश्यक वस्तु प्रदान करती है।

बावजूद इसके भी आज हम इसके महत्व को भूल रहे है और प्रदूषण बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान भी दे रहे है। हमें इस प्रकृति का आभारी होना चाहिए।

यह हमसे कुछ लिए बिना हमें बहुत कुछ देती है। इसलिए हमारा फर्ज बनता है कि हम इस प्रकृति का ध्यान रखें और इसे प्रदूषण मुक्त बनाएं।

अंतिम शब्द

अंत में आशा करता हूँ कि यह लेख आपको पसंद आया होगा और आपको हमारे द्वारा इस लेख में प्रदान की गई अमूल्य जानकारी फायदेमंद साबित हुई होगी।

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