मेरा परिवार पर निबंध

Essay on My Family in Hindi

मेरा परिवार पर निबंध : Essay on My Family in Hindi:- आज के इस लेख में हमनें ‘मेरा परिवार पर निबंध’ से सम्बंधित जानकारी प्रदान की है।

यदि आप मेरा परिवार पर निबंध से सम्बंधित जानकारी खोज रहे है? तो इस लेख को शुरुआत से अंत तक अवश्य पढ़े। तो चलिए शुरू करते है:-

मेरा परिवार पर निबंध : Essay on My Family in Hindi

प्रस्तावना:-

एक व्यक्ति अपने जीवन की शुरुआत से जीवन के अंत तक अपने परिवार के साथ ही रहता है, तो वह मनुष्य एक समाजिक प्राणी है। वह अपना सम्पूर्ण जीवन समूह में ही व्यतीत करता है। वह कभी भी अकेला नही रहता है।

इस समाज की सबसे छोटी इकाई परिवार होता है। व्यक्ति परिवार में स्वयं को सबसे सुरक्षित महसूस करता है। परिवार में माता-पिता होते हैं।

एक व्यक्ति स्वयं को सबसे अधिक सुरक्षित अपने माता-पिता के पास ही महसूस करता है। मनुष्य प्राचीनकाल से ही परिवार में ही रहता है।

पहले मनुष्य को अपने भोजन के लिए शिकार करना पड़ता था व जंगली जानवरों से सुरक्षा को देखते हुए मनुष्य परिवार के साथ ही रहता था।

परिवार क्या है?:-

कुछ लोगों का समूह जो परस्पर रूप से खून व विवाह के पश्चात रिश्तें में एक साथ रहते है, उसे परिवार कहते है। परिवार मुख्य रूप से पति-पत्नी व उनके बच्चों के समूह को कहते है।

लेकिन, कईं जगहों पर समान रक्त संबंध वाले लोग व दत्तक को स्वीकार करने वाले लोगों को भी परिवार कहा जाता है।

मनुष्य के सभी बच्चों का पालन-पोषण परिवार में रहकर ही होता है। पूरे परिवार के लिए एक ही आवासीय स्थान रहता है। सभी लोग मिलकर एक ही घर में रहते है। सभी घर के खर्चों को मिलकर उठाते है।

परिवार के प्रकार:-

परिवार मुख्य रूप से 2 प्रकार के होते है, जो कि निम्नलिखित है:-

  1. संयुक्त परिवार
  2. एकल परिवार
  1. संयुक्त परिवार:- संयुक्त परिवार एकल परिवार का एक समूह होता है। इसमें पूरा परिवार एक साथ मिलकर रहता है। इसमें पति-पत्नी, माता-पिता, बच्चे, दादा-दादी, चाचा-चाची, बुआ, आदि सभी एक साथ मिलकर एक घर में रहते है। उनका खाना एक ही रसोई में बनता है। सभी सदस्य संपत्ति व खर्चें में बराबर हिस्सेदार होते है। सभी सदस्य प्रत्येक सुख-दुख में एक साथ मिलकर रहते है। घर का मुखिया परिवार का सबसे बड़ा सदस्य होता है। परिवार के सभी फैसलें उन्हीं के द्वारा लिए जाते हैं। इसमें पूरा परिवार घर के कार्यों को आपस में मिलकर करते है। इसमें बच्चों को उचित संस्कार मिलते है। मुश्किल परिस्थितियों का सामना एक साथ मिलकर करते है।
  2. एकल परिवार:- इसमें पति-पत्नी व बच्चे साथ मिलकर रहते है। एकल परिवार में व्यापक आत्मनिर्भर बन जाता है, क्योंकि उसका काम करने वाला कोई भी व्यक्ति नही होता है। इसमें बहुत कम सदस्य साथ मिलकर रहते है, जिससे सदस्यों में अधिक भावनात्मक जुड़ाव होता है। एकल परिवार में बुजुर्गों का साथ नही होता है। इसमें परिवार के लोगों को मिलकर ही फ़ैसला लेना होता है।

परिवार के तत्व:-

एक मनुष्य के जीवन में परिवार की आवश्यकता का आंकलन इसी बात से लगाया जा सकता है कि जीवन शुरू होने से लेकर खत्म होने तक भी मनुष्य को परिवार की जरूरत होती है।

परिवार का मुख्य कार्य बच्चों को जन्म देना व उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखना होता है। परिवार बच्चे का लालन-पालन करता है। परिवार का काम सभी सदस्यों की सभी आधारभूत आवश्यकताओं को पूरा करना है। व्यक्ति को संस्कार भी परिवार से ही मिलते है।

उपसंहार:-

एक व्यक्ति की पहचान समाज में उसके परिवार से ही होती है। परिवार के माध्यम से ही वह उसकी संस्कृतिक विरासत को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में भेजता है।

वर्तमान समय में परिवार के आधार पर ही आप विवाह कर सकते हैं। सभी लोग आपके परिवार के आधार पर ही आपके बारे में राय बनाते है। व्यक्ति का पूर्ण विकास परिवार में रहकर ही होता है। परिवार में रहकर वह हर परिस्थिति में रहना सीख जाता है।

अंतिम शब्द

अंत में आशा करता हूँ कि यह लेख आपको पसंद आया होगा और आपको हमारे द्वारा इस लेख में प्रदान की गई अमूल्य जानकारी फायदेमंद साबित हुई होगी।

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