शहरीकरण के कारण प्रदूषण पर निबंध

Essay on Pollution Due to Urbanization in Hindi

शहरीकरण के कारण प्रदूषण पर निबंध : Essay on Pollution Due to Urbanization in Hindi:- आज के इस लेख में हमनें ‘शहरीकरण के कारण प्रदूषण पर निबंध’ से सम्बंधित जानकारी प्रदान की है।

यदि आप शहरीकरण के कारण प्रदूषण पर निबंध से सम्बंधित जानकारी खोज रहे है? तो इस लेख को शुरुआत से अंत तक अवश्य पढ़े। तो चलिए शुरू करते है:-

शहरीकरण के कारण प्रदूषण पर निबंध : Essay on Pollution Due to Urbanization in Hindi

प्रस्तावना:-

भारत को गाँवों का देश भी कहा जाता है लेकिन, धीरे-धीरे शहरों के विकास व सुविधाओं के बढ़ने से गाँवों के लोग शहरों की तरफ जा रहे है।

इससे गाँवों की जनसंख्या तो कम हो रही है लेकिन, शहरों में जनसंख्या बढ़ती ही चली जा रही है। जिस कारण वहाँ का प्रदूषण तीव्र गति से बढ़ रहा है।

शहरों में तो यह हाल हो गया है कि वहाँ साँस लेना भी काफी मुश्किल हो गया है। जिस कारण वहाँ के लोगों को भी काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

शहरी प्रदूषण के कारण:-

  • जनसंख्या वृद्धि:- शहरी प्रदूषण का मुख्य कारण वहाँ पर दिन-प्रतिदिन बढ़ती जनसंख्या है। शहरों में लगातार गाँवों के लोग बस रहे है। जिस कारण वहाँ पर रहने वाले लोगों की जनसंख्या काफी बढ़ गई है। इस कारण वहाँ पर प्रदूषण भी काफी बढ़ गया है। शहरों में प्रदूषण एक बड़ी समस्या बनकर उभर रहा है।
  • वाहनों का प्रयोग बढ़ने से:- आज शहरों में वाहनों की संख्या काफी बढ़ रही है। हर व्यक्ति के पास एक से अधिक वाहन है, जिससे इनका उपयोग भी काफी बढ़ गया है। कोई भी व्यक्ति पैदल या साइकिल के द्वारा कहीं जाना ही नहीं चाहता है। वें कम दूरी के लिए भी वाहनों का प्रयोग करते है, जिस कारण प्रदूषण काफी बढ़ गया है।
  • पेड़ों की कटाई से:- शहरों में जनसंख्या बढ़ने से वहाँ पर लोगों के रहने की व्यवस्था करने के लिए जंगलों को काटकर घर बसाये जा रहे है, जिससे वहाँ पर पेड़ों की संख्या काफी कम हो गई है। पेड़-पौधे इस पर्यावरण के लिए काफी आवश्यक होते है। उनके कटने से प्रदूषण की मात्रा काफी बढ़ गई है।

शहरी प्रदूषण के प्रभाव:-

  • जल प्रदूषण:- शहरों के आसपास जितनी भी नदियाँ व तालाब है, वह सभी शहरों से निकलने वाले गंदे पानी व कचरे से प्रदूषित हो गए है। इससे जल प्रदूषण काफी बढ़ गया है। लोग अपने घरों का कूड़ा-कचरा नदियों में ही फेंक देते है। जल प्रदूषण से पीने के पानी की समस्या शहरों में काफी बढ़ गई है।
  • वायु प्रदूषण:- शहरों में जनसंख्या काफी बढ़ गई है, जिससे वहाँ भीड़भाड़ भी हो रही है। शहरों में वाहनों व कईं सुविधाओं के उपयोग से वहाँ की वायु काफी प्रदूषित हो गई है। वहाँ पर साँस लेना भी काफी मुश्किल हो रहा है। वायु प्रदूषण से लोगों में साँस एवं फेफड़ों से संबंधित बीमारियाँ भी हो रही है।
  • ध्वनि प्रदूषण:- शहरों में भीड़भाड़, लाऊडस्पीकरों एवं वाहनों के हॉर्न के प्रयोग से वहाँ पर ध्वनि प्रदूषण काफी बढ़ रहा है। लोग बिना आवश्यकता के भी सड़कों पर हॉर्न बजाते रहते है। इससे शहरी इलाकों में काफी शोर-शराबा होता है। जिससे लोगों को काफी समस्या झेलनी पड़ती है। ध्वनि प्रदूषण से मनुष्य को बहरेपन की समस्याएँ भी होती है और उसका चिडचिडापन भी काफी बढ़ जाता है।
  • बीमारियाँ:- शहरी प्रदूषण के कारण वहाँ पर बीमारियाँ भी काफी बढ़ गई है। गाँवों के मुकाबले शहरों के लोग ज्यादा बीमार पड़ते है। उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी काफी कम होती है। प्रदूषण के कारण उन्हें कईं तरह की समस्या भी होने लगती है। उन्हें श्वास संबंधी समस्या के साथ-साथ और भी कईं तरह की समस्याएँ होती है।

शहरीकरण को रोकना:-

  • गाँवों में रोजगार उपलब्ध करवाना:- ज्यादातर लोग शहरों की तरफ सिर्फ इसलिए जाते है ताकि, उन्हें अच्छा रोजगार प्राप्त हो सके और वें अपने परिवार का पालन-पोषण अच्छी तरह से कर सके और अपने बच्चों को भी अच्छी शिक्षा प्रदान कर सके। यदि गाँवों में रोजगार बढ़ेगा तो शहरों की तरफ जाने वाले लोगों की संख्या काफी कम हो जाएगी। इससे शहरी जनसंख्या में कमी होगी।
  • उत्तम शिक्षा व्यवस्था:- गाँवों में शिक्षा तो प्राप्त होती है लेकिन, वह शहरों जितनी अच्छी नहीं होती है। जिस कारण लोग अच्छी शिक्षा प्राप्त करने के लिए शहरों की तरफ जाते है ताकि, उन्हें उत्तम शिक्षा प्राप्त हो सके। यदि गाँवों में शिक्षा व्यवस्था अच्छी होगी तो लोग शिक्षा के लिए शहरों की तरफ नहीं जाएंगे।
  • गाँवों में आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध करवाना:- आज भी गाँवों के इलाकों में छोटी-मोटी वस्तुओं के लिए लोगों को काफी दूर तक जाना पड़ता है। उनके आसपास एक अस्पताल भी नहीं होता है। जिससे लोग शहरों की तरफ जाने के लिए मजबूर हो जाते है। यदि यें सुविधाएँ लोगों को गाँवों में ही उपलब्ध होने लगे तो वें शहरों की तरफ जाना कम कर देंगे।

उपसंहार:-

शहरीकरण एक बड़ी समस्या बन गई है। कुछ लोग मज़बूरी में तो कुछ लोग सिर्फ वहाँ की चकाचोंध देखकर वहाँ की तरह जाने लगे है।

इससे कईं गाँव खाली हो गए है और शहरों में पैर रखने की जगह भी नहीं बची है। इससे वहाँ के लोगों को रहने के साथ-साथ लोगों के बढ़ने से होने वाले प्रदूषण का सामना भी करना पड़ रहा है।

हमें इस शहरीकरण को रोकने की आवश्यकता है अन्यथा भारत के गाँवों में तो कोई भी नहीं बचेगा।

हमें शहरो में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए भी आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है अन्यथा इस प्रकृति व जीव-जन्तुओं का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।

अंतिम शब्द

अंत में आशा करता हूँ कि यह लेख आपको पसंद आया होगा और आपको हमारे द्वारा इस लेख में प्रदान की गई अमूल्य जानकारी फायदेमंद साबित हुई होगी।

अगर इस लेख के द्वारा आपको किसी भी प्रकार की जानकारी पसंद आई हो तो, इस लेख को अपने मित्रों व परिजनों के साथ फेसबुक पर साझा अवश्य करें और हमारे वेबसाइट को सबस्क्राइब कर ले।

Give 5 Star Rating

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published.