गणतंत्र दिवस पर अध्यापकों के लिए भाषण

Speech on Republic Day for Teachers in Hindi

गणतंत्र दिवस पर अध्यापकों के लिए भाषण : Speech on Republic Day for Teachers in Hindi:- आज के इस लेख में हमनें ‘गणतंत्र दिवस पर अध्यापकों के लिए भाषण’ से सम्बंधित जानकारी प्रदान की है।

यदि आप गणतंत्र दिवस पर अध्यापकों के लिए भाषण से सम्बंधित जानकारी खोज रहे है? तो इस लेख को शुरुआत से अंत तक अवश्य पढ़े। तो चलिए शुरू करते है:-

गणतंत्र दिवस पर अध्यापकों के लिए भाषण : Speech on Republic Day for Teachers in Hindi

सुप्रभात, आदरणीय प्रधानाचार्य जी, मेरे साथी अध्यापकगण एवं प्यारे बच्चों, आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार।
मेरा नाम ——— है। सबसे पहले मैं आप सभी को धन्यवाद देना चाहता हूँ कि आप सभी ने मुझे इस मंच पर इस अयोजन को शुरू करने का अवसर प्रदान दिया।

आज का दिन भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन है। 26 जनवरी के दिन ही भारत में संविधान को लागू किया गया था।

संविधान को यदि आसान भाषा में समझे तो इसका अर्थ होता है:- देश को सुचारु रूप से चलाने के लिए जो नियम एवं कानून बनाए गए है और एक जगह लिखकर रखा गया है, उसे ही संविधान कहा जाता है।

भारत में संविधान 26 जनवरी 1950 के दिन लागू किया गया था। तब से ही इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।

यदि भारत के संविधान की बात की जाए तो इसे विश्व के बहुत से देशों के संविधान से लिया गया है। उस समय इसमें 395 अनुच्छेद, 22 खण्ड व 8 अनुसूचियां थी।

जबकि, वर्तमान में इसमें 470 अनुच्छेद व 12 अनुसूचियां है। इसे बनाने में कुल 2 वर्ष, 11 माह व 18 दिन का समय लगा था। यह 26 जनवरी 1949 के दिन बनकर तैयार हो गया था।

लेकिन, इसे उस दिन लागू नही किया गया। जिसका कारण यह था कि 26 जनवरी 1930 के दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की मांग की व इस दिन को स्वराज दिवस के रूप में मनाने लगे।

इसके पश्चात प्रतिवर्ष इस दिवस को मनाया जाने लगा। इससे लोगों की भावनाए जुड़ गई। जब भारत का संविधान लागू किया गया तो इसमें सभी देशवासियों को इस संविधान के अधीन रहना था।

इस दिन का महत्व न घट जाए, इसीलिए 2 माह का इंतजार करके 26 जनवरी के दिन इसे लागू किया गया। इसे भारत के एक राष्टीय पर्व के रूप में मनाया जाता है।

भारत के संविधान को बनाने के लिए एक संविधान सभा का आयोजना किया गया। इसका गठन सन 1946 में किया गया था। जिसमें 389 सदस्य थे।

लेकिन, जब भारत आजाद हुआ तो इसका भी 2 भागों में बंटवारा हो गया। जिसके बाद इस सभा के सदस्यों की संख्या 299 ही रह गई।

इस सभा का अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद जी को बनाया गया। भारत के संविधान को हिंदी व अंग्रेज़ी भाषा में लिखा गया है। आज भी संसद भवन में इसे रखा गया है।

डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर को संविधान का जनक कहा जाता है। आज भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यहाँ पर प्रत्यक्ष रूप से जनता का ही राज है। सभी को मतदान करने का अधिकार है।

इस पर्व के प्रति इतना जोश को देखकर मुझे आज आप सभी विद्यार्थियों पर बहुत गर्व है। इससे हमें आपकी देशभक्ति को देखने का मौका मिला।

आप सभी को इस दिन का महत्व समझना होगा कि किस तरह हमारे देश के लोगों ने आजादी प्राप्त की और यहाँ पर भारत का अपना संविधान लागू किया। इसके लिए बहुत से लोगों ने अपना पूरा जीवन लगा दिया।

आज हम सभी उन वीरों को भी याद करेंगे और जिस आजादी को पाने के लिए उन्होंने अपना सब कुछ लगा दिया, उस आजादी व संविधान का दिल से सम्मान करेंगे व उसका पालन करेंगे।

आज हमारे विद्यालय ने एक छोटे से कार्यक्रम का आयोजन किया है। इस कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद।

इतना कहकर मैं अपने भाषण को समाप्त करता हूँ और आशा करता हूँ कि आपको मेरा यह भाषण पसंद आया होगा।

धन्यवाद!

अंतिम शब्द

अंत में आशा करता हूँ कि यह लेख आपको पसंद आया होगा और आपको हमारे द्वारा इस लेख में प्रदान की गई अमूल्य जानकारी फायदेमंद साबित हुई होगी।

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