संत रविदास जयंती पर भाषण

Speech on Sant Ravidas Jayanti in Hindi

संत रविदास जयंती पर भाषण : Speech on Sant Ravidas Jayanti in Hindi:- आज के इस लेख में हमनें ‘संत रविदास जयंती पर भाषण’ से सम्बंधित जानकारी प्रदान की है।

यदि आप संत रविदास जयंती पर भाषण से सम्बंधित जानकारी खोज रहे है? तो इस लेख को शुरुआत से अंत तक अवश्य पढ़े। तो चलिए शुरू करते है:-

संत रविदास जयंती पर भाषण : Speech on Sant Ravidas Jayanti in Hindi

सुप्रभात, आदरणीय प्रधानाचार्य जी, सभी अध्यापकगण एवं मेरे साथियों, आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार। मेरा नाम ——— है और मैं इस विद्यालय में 12वीं कक्षा का विद्यार्थी हूँ।

सबसे पहले मैं आप सभी को धन्यवाद देना चाहता हूँ कि आप सभी ने मुझे इस मंच पर अपने विचार व्यक्त करने का अवसर प्रदान दिया।

भारत का इतिहास बहुत ही गौरवमय रहा है। आज भी विश्व में भारत की संस्कृति सबसे महान मानी जाती है। इसमें भारत के महान संतों का भी बहुत बड़ा योगदान है।

आज हम ऐसे ही एक संत की बात कर रहे है, जिन्होंने अपने काव्य के माध्यम से समाज में फैली कुरूतियों को खत्म करने का प्रयास किया था। उनका नाम है:- संत रविदास जी।

संत रविदास जी का जन्म सन 1433 में बनारस के एक छोटे से गाँव गोवर्धन में हुआ था। इस दिन को ही संत रविदास जयंती के रूप में मनाया जाता है।

उनके पिता का नाम रग्घू था। जबकि, उनकी माता का नाम घुरबिनिया देवी था। वह हरिजन समुदाय से आते थे। उस समय जाति-प्रथा अपनी चर्म सीमा पर थी।

उस समय छोटी जाति के लोगों पर बहुत अन्याय होते थे। कईं बार संत रविदास जी को भी इसका सामना करना पड़ा। इसलिए, उन्होंने अपना पूरा जीवन इस प्रथा को समाप्त करने में लगा दिया।

उस समय हिंदू-मुस्लिम में कईं टकराव होते था। उन्होंने हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए बहुत काम किया। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज में हो रहे भेदभाव को पूरी तरह से खत्म करने में लगा दिया।

उनके प्रवचन लोग बहुत अधिक पसंद किया करते थे। दूर-दूर से लोग उनसे मिलने आया करते थे।

कहा जाता है कि उनसे कईं राजा व महाराजा मिलने आया करते थे और वे उनसे प्रसन्न होकर उन्हें भेट में बहुत कुछ दिया करते थे। लेकिन, उन्होंने कभीं भी किसी से कुछ भी नही लिया।

इस जयंती को माघ महीने की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। अंग्रेज़ी कैलेंडर के हिसाब से इसे फरवरी व मार्च में मनाया जाता है।

उन्होंने रविदासिया धर्म की स्थापना की। गुरु रविदास जयंती के दिन को इस धर्म में बड़े त्यौहार के रूप में मनाया जाता है।

रविदास जी बहुत ही महान संतों में से एक थे। उन्होंने अपनी पहचान एक कवि व समाजसुधारक के रूप में बनाई। वह भगवान के अनुयायी थे।

उनकी जयंती पर उनके भक्तों द्वारा उनकी छवि की पूजा की जाती है। वे सुबह-सुबह गंगा नदी या अन्य किसी भी पवित्र नदी में स्नान कर उनकी पूजा करते है।

इस दिन पूरी दुनिया से उनकी जन्मस्थली में बने मंदिर में लोग उनके दर्शन करने आते है और बहुत ही विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। उनके जन्म दिवस को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।

उनके द्वारा दिया गया ज्ञान आज भी मौजूद है। आज भी उनकी कविताओं द्वारा यह ज्ञान लोगों तक पहुँचता रहता है। आज हम उनके द्वारा दिए गए ज्ञान को अपने जीवन में उतारे व अपना जीवन सफल बनाए।

इतना कहकर मैं अपने भाषण को समाप्त करता हूँ और आशा करता हूँ कि आपको मेरा यह भाषण पसंद आया होगा।

धन्यवाद!

अंतिम शब्द

अंत में आशा करता हूँ कि यह लेख आपको पसंद आया होगा और आपको हमारे द्वारा इस लेख में प्रदान की गई अमूल्य जानकारी फायदेमंद साबित हुई होगी।

अगर इस लेख के द्वारा आपको किसी भी प्रकार की जानकारी पसंद आई हो तो, इस लेख को अपने मित्रों व परिजनों के साथ फेसबुक पर साझा अवश्य करें और हमारे वेबसाइट को सबस्क्राइब कर ले।

5/5 - (1 vote)

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *