शिक्षक दिवस के उत्सव पर भाषण

Speech on Teacher's Day Celebration in Hindi

शिक्षक दिवस के उत्सव पर भाषण : Speech on Teacher’s Day Celebration in Hindi:- आज के इस लेख में हमनें ‘शिक्षक दिवस के उत्सव पर भाषण’ से सम्बंधित जानकारी प्रदान की है।

यदि आप शिक्षक दिवस के उत्सव पर भाषण से सम्बंधित जानकारी खोज रहे है? तो इस लेख को शुरुआत से अंत तक अवश्य पढ़े। तो चलिए शुरू करते है:-

शिक्षक दिवस के उत्सव पर भाषण : Speech on Teacher’s Day Celebration in Hindi

सुप्रभात, आदरणीय प्रधानाचार्य जी, सभी अध्यापकगण एवं मेरे साथियों, आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार। मेरा नाम ——– है और मैं इस विद्यालय में 12वीं कक्षा का विद्यार्थी हूँ।

सबसे पहले मैं आप सभी को धन्यवाद देना चाहता हूँ कि आप सभी ने मुझे इस मंच पर अपने विचार व्यक्त करने का अवसर प्रदान दिया।

आज हम सभी इस विद्यालय प्रांगण में शिक्षा दिवस के उत्सव को मनाने के लिए एकत्रित हुए है। मैं सबसे पहले आप सभी को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ देना चाहता हूँ।

एक व्यक्ति को सफल होने के लिए ज्ञान की आवश्यकता होती है। ज्ञान के बिना कोई भी व्यक्ति कभी भी सफल नही हो सकता है।

किसी भी कार्य को करने के लिए उचित ज्ञान की आवश्यकता होती है। यदि अनुचित ज्ञान व अधूरे ज्ञान के साथ अगर आप कोई भी कार्य करेंगे तो वह कार्य कभी भी पूरा नहीं हो पाएगा।

हमारे पूर्वज भी कहते थे कि अधूरा ज्ञान अज्ञानता से भी खतरनाक होता है। इसलिए सही ज्ञान का होना बहुत आवश्यक है। सही ज्ञान प्राप्त करने के लिए हमेशा ही एक अच्छे शिक्षक की जरुरत होती है।

एक शिक्षक उस कुम्हार की तरह होता है, जो एक घड़ा तैयार करता है। जिस प्रकार कुम्हार मिट्टी को गूँथता है, उसे चकरी में रखकर उसे अंदर से सहलाता है व उसे मजबूत करने के लिए उसे आग में तपाता है।

ठीक उसी प्रकार एक शिक्षक भी एक बच्चे को ज्ञान के साथ-साथ उसे जीवन जीने के उचित मूल्य प्रदान करता है।

मैं सबसे पहले आप सभी को यह बताना चहता हूँ कि शिक्षक दिवस को 5 सितंबर के दिन ही क्यों मनाया जाता है? आज डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णनजी का जन्म दिवस है।

उनके जन्मदिवस को ही शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनका जन्म 5 सितंबर 1888 के दिन हुआ था। वह प्रख्यात शिक्षक, महान दार्शनिक व महान हिन्दू विचारक थे।

वह बचपन से ही बहुत प्रतिभावान थे। उन्होंने अपनी पहचान एक शिक्षक के रूप में बनाई। उनकी काबिलियत को देखकर ही जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें संविधान सभा में शामिल कर दिया।

उन्होंने भारत की आजादी के लिए हुए कईं स्वतंत्रता आंदोलनों में भाग लिया। उन्हें स्वतंत्र भारत का पहला उपराष्ट्रपति व दूसरा राष्ट्रपति भी नियुक्त किया गया।

वह अपने कार्यों में बहुत व्यस्त रहते थे लेकिन, जब भी उन्हें समय मिलता था, वह बच्चों को शिक्षित करने के लिए पहुँच जाया करते थे।

उनका मानना था कि पूरा विश्व एक विद्यालय के समान है। मनुष्य के मस्तिष्क का सही उपयोग करने के लिए उसमें ज्ञान का बीज बौना बहुत जरूरी है। शिक्षा के माध्यम से उसका पूरा सदुपयोग किया जा सकता है।

कहा जाता है कि वह बच्चों को पढ़ाने से पहले स्वयं उस विषय का गहन अध्ययन किया करते थे, ताकि वह कक्षा में विद्यार्थियों की हर जिज्ञासा को शांत कर सके।

वह बच्चों को कहानियों के माध्यम से शिक्षित किया करते थे, जिससे उन्हें आसानी से समझ आ जाए। वह एक आदर्श शिक्षक थे। इसलिए, उनके जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रूप में चुना गया।

इस उपलक्ष में हमारे विद्यालय में एक छोटे से उत्सव का आयोजन किया गया है। इस उत्सव में हम हमारे सभी शिक्षकों को सम्मानित करेंगे।

हम कभी भी उनके द्वारा दी गई शिक्षा का मूल्य तो नही चुका सकते है। परन्तु, हमनें एक छोटा सा प्रयास किया है। मुझे आशा है कि आप सभी शिक्षकों को हमारा यह प्रयास पसंद आयेगा।

इतना कहकर मैं अपने भाषण को समाप्त करता हूँ और आशा करता हूँ कि आपको मेरा यह भाषण पसंद आया होगा।

धन्यवाद!

अंतिम शब्द

अंत में आशा करता हूँ कि यह लेख आपको पसंद आया होगा और आपको हमारे द्वारा इस लेख में प्रदान की गई अमूल्य जानकारी फायदेमंद साबित हुई होगी।

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