शिक्षक दिवस पर छात्रों द्वारा स्वागत भाषण

Welcome Speech on Teacher’s Day by Students in Hindi

शिक्षक दिवस पर छात्रों द्वारा स्वागत भाषण : Welcome Speech on Teacher’s Day by Students in Hindi:-

आज के इस लेख में हमनें ‘शिक्षक दिवस पर छात्रों द्वारा स्वागत भाषण’ से सम्बंधित जानकारी प्रदान की है।

यदि आप शिक्षक दिवस पर छात्रों द्वारा स्वागत भाषण से सम्बंधित जानकारी खोज रहे है? तो इस लेख को शुरुआत से अंत तक अवश्य पढ़े। तो चलिए शुरू करते है:-

शिक्षक दिवस पर छात्रों द्वारा स्वागत भाषण : Welcome Speech on Teacher’s Day by Students in Hindi

सुप्रभात, आदरणीय प्रधानाचार्य जी, मेरे साथी अध्यापकगण एवं प्यारे बच्चों, आप सभी को मेरा प्यारभरा नमस्कार।

मेरा नाम —— है और मैं इस विद्यालय में 12वीं कक्षा का विद्यार्थी हूँ। सबसे पहले मैं आप सभी को धन्यवाद देना चाहता हूँ कि आप सभी ने मुझे इस मंच पर अपने विचार व्यक्त करने का अवसर प्रदान दिया।

आज मैं बहुत खुश हूँ कि मुझे इस अवसर पर आप सभी का स्वागत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

आज 5 सितंबर का दिन है और आज के दिन को सम्पूर्ण भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि इस दिन डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म हुआ था।

उनका जन्म 5 सितंबर, 1888 को तमिलनाडु के एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल तिरुतनी ग्राम नामक स्थान पर हुआ था। वह एक गरीब ब्राह्मण परिवार से थे।

उनके पिता का नाम सर्वपल्ली विरास्वामी था। वह काफी विद्वान थे, किंतु उनकी आर्थिक स्थिति काफी दयनीय थी।

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन बचपन से ही बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। उनकी शिक्षा एक क्रिश्चियन विद्यालय मे पूर्ण हुई। वह बचपन से ही पढ़ाई में बहुत होशियार थे।

जैसे-जैसे वह बड़े होते गए, उनकी योग्यता भी बढ़ती रही। उनकी इसी योग्यता को देखकर उन्हें संविधान बनाने वाली सभा का सदस्य बनाया गया।

उन्हें राजदूत बनाकर रूस के साथ राजनयिक कार्यों के लिए भेज दिया गया। उन्हें 1952 में भारत का उपराष्ट्रपति बना दिया गया और उसके पश्चात सन 1962 में भारत का राष्ट्रपति भी नियुक्त किया गया।

उन्हें शुरू से ही पढ़ाने का बहुत शोक था। उन्हे जब भी समय मिलता था, तब-तब वह विद्यालय में पहुंच जाते थे।

इसलिए, उन्होंने अपने जन्मदिवस के दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने के लिए आग्रह किया। उस दिन से ही उनके जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

उन्हें भारत का सबसे बड़ा सम्मान “भारत रत्न” दिया गया था। शिक्षक किसी भी बच्चे का भविष्य तय करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।

शिक्षक एक बच्चे को एक कुम्हार की तरह पढ़ाते है। जैसे कुम्हार घड़े को सींचता है, ठीक उसी प्रकार शिक्षक पहले बच्चे को सींचता है, फिर उसे तपाता है। जिससे बच्चे हर परिस्थिति के लिए तैयार रहते है।

शिक्षक बच्चे को पढ़ाने के साथ-साथ उनका मार्गदर्शन भी करते हैं। उन्हें अपना भविष्य चुनने के लिए सही राह दिखाते है।

यदि बच्चा गलत राह पर चला जाए, तो उसे प्यार व कईं बार डांटकर उनका सही मार्गदर्शन करते है। एक बच्चे को अपने अध्यापक की हमेशा ही इज्जत करनी चाहिए।

शिक्षक की जरूरत का आंकलन इसी बात से लगाया जा सकता है कि भगवान को जन्म लेने के बाद दीक्षा के लिए गुरु की ही आवश्यकता पड़ती है।

गुरु एक दीपक के समान होता है, जो अंधकार में चमककर अपने शिष्य को रौशनी प्रदान करता है। वैसे तो हमें हमेशा ही अपने शिक्षकों का सम्मान करना चाहिए।

लेकिन, आज इस अवसर पर हमने अपने शिक्षकों के सम्मान के लिए एक छोटे से कार्यक्रम का आयोजन किया है।

आज हम सभी सीनियर्स ने बच्चों को अध्यापक बनकर पढ़ाया। आज हम सभी ने मिलकर अपने सभी शिक्षकों के लिए एक छोटा सा उपहार लिया है।

इसके साथ-साथ हम सभी ने एक छोटे से कार्यक्रम का आयोजन किया है। वैसे तो हम सभी चाहकर भी अपने गुरुओं का गुणगान नही कर सकते है।

लेकिन फिर भी मैंने एक छोटी सी कोशिश की। मैं अपने इस भाषण के माध्यम से शिक्षकों के सम्मान में कुछ शब्द कह सकूं।

मैं आशा करता हूँ कि आपको मेरा यह भाषण पसंद आया होगा। इतना कहकर मैं अपने इस भाषण को समाप्त करता हूँ और आशा करता हूँ कि आपको मेरा यह भाषण पसंद आया होगा।

धन्यवाद!

अंतिम शब्द

अंत में आशा करता हूँ कि यह लेख आपको पसंद आया होगा और आपको हमारे द्वारा इस लेख में प्रदान की गई अमूल्य जानकारी फायदेमंद साबित हुई होगी।

अगर इस लेख के द्वारा आपको किसी भी प्रकार की जानकारी पसंद आई हो तो, इस लेख को अपने मित्रों व परिजनों के साथ फेसबुक पर साझा अवश्य करें और हमारे वेबसाइट को सबस्क्राइब कर ले।

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