भगत सिंह पर निबंध

Essay on Bhagat Singh in Hindi

भगत सिंह पर निबंध : Essay on Bhagat Singh in Hindi:- आज के इस लेख में हमनें ‘भगत सिंह पर निबंध’ से सम्बंधित जानकारी प्रदान की है।

यदि आप भगत सिंह पर निबंध से सम्बंधित जानकारी खोज रहे है? तो इस लेख को शुरुआत से अंत तक अवश्य पढ़े। तो चलिए शुरू करते है:-

भगत सिंह पर निबंध : Essay on Bhagat Singh in Hindi

प्रस्तावना:-

भारत काफी समय तक अंग्रेजों का गुलाम रहा है। उस समय भारत के लोगों को जानवरों की तरह रहने पर मजबूर किया जाता था।

भारत लगभग 200 वर्षों तक अंग्रेजों का गुलाम बनकर रहा है। भारत हमेशा से ही क्रांतिकारियों व वीरों का देश रहा है, जिन्होंने इस देश को अंग्रेजी शासन से आजाद करवाने के लिए अपने प्राण न्योंछावर कर दिए।

उन्हीं क्रांतिकारियों में से एक क्रांतिकारी भगत सिंह थे, जिन्होंने इस देश को स्वतंत्र करवाने के लिए बहुत छोटी आयु में हँसते-हँसते अपने प्राणों की कुर्बानी दे दी।

भगत सिंह का जीवन परिचय:-

भगत सिंह भारत के महान क्रांतिकारियों में से एक थे, जिन्होंने काफी छोटी आयु में ही अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया और इतनी छोटी आयु में ही देश के लिए शहीद भी हो गए।

उनका जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के लायलपुर जिले के एक छोटे से गांव ‘बंगा‘ में हुआ। उनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह एवं माता का नाम विद्यावती कौर था।

वह एक क्रांतिकारी परिवार में पैदा हुए थे। उनके पिता व दादा भी एक क्रांतिकारी थे। उन्हें क्रांतिकारी बनने की प्रेरणा अपने पिता से ही प्राप्त हुई। वह बचपन से ही देश को स्वतंत्र करवाने के लिए एक क्रांतिकारी बनना चाहते थे।

भगत सिंह का क्रांतिकारी जीवन:-

भगत सिंह ने मात्र 14 वर्ष की आयु से ही पंजाब के क्रांतिकारी संस्थानों में कार्य करना प्रारम्भ कर दिया।

13 अप्रेल 1919 को अमृतसर में हुए जलियावाला बाग हत्याकांड ने भगत सिंह के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला, जिसके कारण उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़कर आजादी में अपना योगदान देने के लिए नौजवान भारत सभा की स्थापना की।

भगत सिंह का अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विरोध संघर्ष करने से अंग्रेजी सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। जिससे वह कईं माह तक कारावास में कैद रहे।

भारत में साइमन कमीशन के कारण देश में विरोध प्रदर्शन हुआ। इस विरोध प्रदर्शन में अंग्रेजी हुकूमत ने विरोध कर रहे युवाओं और इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे लाला लाजपत राय की लाठी मारकर हत्या कर दी।

इससे भगत सिंह काफी अधिक प्रभावित हुए। तब उन्होंने राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आजाद व अन्य क्रांतिकारियों के साथ मिलकर पुलिस अफसर जॉन सॉन्डर्स की गोली मारकर हत्या कर दी।

इसी के खिलाफ भगत सिंह ने राजगुरु तथा सुखदेव के साथ मिलकर चलती केंद्रीय असेम्बली में बम फेंका।

उन्होंने वहाँ से भागने के बजाय स्वयं को पुलिस के हवाले कर दिया, जिससे अंग्रेजी हुकूमत ने भगत सिंह, राजगुरु तथा सुखदेव को गिरफ्तार कर दिया।

भगत सिंह की फांसी:-

जब भगत सिंह, राजगुरु तथा सुखदेव को गिरफ्तार किया गया। उसके बाद उन्हें फाँसी की सजा सुनाई गई, जिसकी तारीख 24 मार्च तय की गई। लेकिन पूरा भारत इस फाँसी के खिलाफ जेल के बाहर विरोध प्रर्दशन कर रहा था।

सभी लोग इस फाँसी को रोकना चाहते थे। जनता के इस आक्रोश से बचने के लिए भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को 23 मार्च की रात को ही गुप्त फाँसी दे दी गई।

उसके बाद आंदोलन आक्रमक न हो जाए, इसलिए उनके शरीर को छोटे टुकड़ों में काटकर बोरियों में भर दिया गया और उसके बाद सतलुज नदी के किनारे उन्हें जलाने का प्रयास किया गया, लेकिन गाँव वालों ने यह देख लिया।

गाँव वालों ने उनके बचे हुए शरीर के हिस्सों को निकालकर पूरे विधि-विधान से उनका अंतिम संस्कार किया।

उपसंहार:-

भगत सिंह काफी छोटी आयु में ही इस देश के लिए शहीद हो गए। वह इस देश के युवाओं के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। उनको फाँसी देने के बाद भारत के लोग एकजुट हो गए और उन्होंने साथ मिलकर देश को आजाद करवाया।

जब-जब भारत की आजादी और देश के लिए मरने-मिटने की बात होगी, तब-तब भगतसिंह का नाम अवश्य लिया जाएगा।

वह इस देश के वीर सपूत है, जिन्होंने अपनी जान की फ़िक्र किये बिना इस देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्योंछावर कर दिए। भगत सिंह के महान बलिदान को यह देश कभी भी भूल नहीं सकता है।

अंतिम शब्द

अंत में आशा करता हूँ कि यह लेख आपको पसंद आया होगा और आपको हमारे द्वारा इस लेख में प्रदान की गई अमूल्य जानकारी फायदेमंद साबित हुई होगी।

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