वनोन्मूलन पर निबंध

Essay on Deforestation in Hindi

वनोन्मूलन पर निबंध : Essay on Deforestation in Hindi:- आज के इस लेख में हमनें ‘वनोन्मूलन पर निबंध’ से सम्बंधित जानकारी प्रदान की है।

यदि आप वनोन्मूलन पर निबंध से सम्बंधित जानकारी खोज रहे है? तो इस लेख को शुरुआत से अंत तक अवश्य पढ़े। तो चलिए शुरू करते है:-

वनोन्मूलन पर निबंध : Essay on Deforestation in Hindi

प्रस्तावना:-

वन इस प्रकृति के लिए काफी आवश्यक है। वनों से ही इस प्रकृति का संतुलन बना रहता है। यें वन मनुष्य को जीवन प्रदान करते है। वनों के बिना इस धरती पर हमारा जीवन असम्भव है।

वनोन्मूलन का अर्थ ‘वनों का नष्ट होना’ है। सीधे शब्दों में कहें तो मनुष्य द्वारा जंगलों को समाप्त करना ही वनोन्मूलन कहलाता है।

आज मनुष्य अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए लगातार वनों की कटाई कर रहा है और अपने लिए आवास बना रहा है। लेकिन, इससे जानवरों का आवास छिन रहा है।

जिससे जानवर आज मनुष्य के रहने की जगह पर घूम रहे है। आज वनों की कटाई से इस प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है, जो वन्यजीव व मानवजाति के लिए काफी खतरनाक है।

वनों का महत्व:-

वन इस धरती पर प्रत्येक जीव के लिए काफी महत्वपूर्ण है, इन वनों से ही इस प्रकृति का संतुलन बना रहता है। वन प्रत्येक जीव को जीवनयापन के लिए आवश्यक वस्तुएं प्रदान करते है।

इन वनों से न सिर्फ हमें खाने के लिए बल्कि और भी कईं आवश्यक वस्तुएं प्राप्त होती है। आज लकड़ी से मनुष्य कितनी वस्तुएं बनाता है, जो हमारे रोजमर्रा के जीवन में काफी उपयोग में आती है।

यें वन ही है, जिनसे हमें ऑक्सीजन प्राप्त होती है। बिना ऑक्सीजन के तो हम जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते है। यह सभी वन्यजीवों को रहने के लिए आवास व भोजन प्रदान करता है, जिससे वें अपना जीवनयापन कर पाते है।

वनों के अस्तित्व से ही हम सभी का अस्तित्व है। जिस दिन इस पृथ्वी से वन समाप्त हो जायेंगे, उस दिन इस पृथ्वी का भी विनाश हो जाएगा।

वनोन्मूलन के कारण:-

  • कृषि:- लोग कृषि करने के लिए भी वनों की कटाई करते है। आज जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ रही है, उनकी मांगें भी बढ़ रही है। जिस कारण इतने अधिक लोगों को खाना खिलाने के लिए अधिक कृषि की आवश्यकता है। इसलिए लोग वनों को काटकर उस स्थान पर खेती कर रहे है।
  • जनसंख्या वृद्धि:- आज हमारे देश में जनसंख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती चली जा रही है। जिस कारण इतने लोगों के रहने के लिए आवास की आवश्यकता होती है। इतने अधिक लोगों को आवास प्रदान करना आसान बात नहीं है। इसलिए, इनके लिए आवास की व्यवस्था करने के लिए वनों की कटाई की जा रही है, ताकि लोग आराम से रह सके।
  • खनिज खनन:-खनिज पदार्थ प्राप्त करने के लिए जमीन में खुदाई की जा रही है। तभी खनिज पदार्थ प्राप्त होते है। इन खनिज पदार्थों को निकालने के लिए लगातार वनों की कटाई की जा रही है।
  • लकड़ी का उपयोग:- वर्तमान समय में लोग लकड़ी के कईं सामान बनाते है, जो मनुष्य के रोजमर्रा के कार्यों में उपयोग किये जाते है। जिस कारण इन लकड़ियों के लिए वनों की कटाई की जा रही है। आज लोग लकड़ी से कईं ऐसी रचनात्मक व सजावटी वस्तुएं बना रहे है, जिनकी बाजार में काफी मांग है। जिससे वनों की कटाई बढ़ रही है।
  • शहरीकरण:- इस आधुनिक युग में सभी लोग शहरों में रहकर सुख-सुविधाओं का उपयोग करना चाहते है, जिस कारण काफी अधिक जनसंख्या शहरों की तरफ जा रही है। इतने अधिक लोगों के रहने की व्यवस्था करना काफी मुश्किल है, इसलिए वनों को काटकर लोगों के रहने की व्यवस्था की जा रही है।

वनोन्मूलन के परिणाम:-

वनोन्मूलन के परिणाम निम्नलिखित है:-

  • मृदा अपरदन:- वनोन्मूलन से मृदा का अपरदन होता है। जब पृथ्वी पर पेड़-पौधें नहीं होते है, तो उसकी मिट्टी वर्षा के साथ आसानी से बह जाती है। जिससे यह भू-आकृतियों को प्रभावित करती है।
  • बाढ़ व सूखा की स्थिति:- वनों की कटाई होने से बाढ़ आने का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि पेड़-पौधें पानी का अवशोषण करके उसे जमीन के नीचे ले जाते है। लेकिन, पेड़-पौधों के न होने से यह प्रक्रिया नहीं हो पाती है और वह सम्पूर्ण पानी नदियों में चला जाता है, जिस कारण बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। पेड़-पौधों के न होने से उस जमीन में पानी नहीं जा पाता है, जिस कारण वहाँ गर्मी के समय सूखा पड़ने लगता है। सूखा पड़ने से नए पौधें व जीव-जंतु बिना पानी के मर जाते है।
  • ऑक्सीजन की कमी:- इन जंगलों से ही हमें ऑक्सीजन की प्राप्ति होती है और आज वनों की कटाई होने से प्रकृति में कार्बन-डाईऑक्साइड की मात्रा तो बढ़ रही है, लेकिन ऑक्सीजन धीरे-धीरे कम हो रही है। बिना ऑक्सीजन के कोई जीव एक सेकण्ड भी जीवित नहीं रह सकता है। हमें जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।
  • जलवायु परिवर्तन:- वनों की कटाई से इस जलवायु में काफी परिवर्तन हो रहे है। समय पर वर्षा भी नहीं होती है और तापमान भी बढ़ रहा है। वनों की कटाई से जलवायु में संतुलन बिगड़ रहा है, जो कि इस प्रकृति के लिए काफी खतरनाक है।

उपसंहार:-

मनुष्य अपने स्वार्थ में अंधा होकर लगातार वनों को समाप्त करने में लगा हुआ है। नए पेड़ तो बहुत कम लगाए जा रहे है, लेकिन बहुत अधिक मात्रा में पेड़ काटे जा रहे है।

जिस कारण आज वनों की मात्रा काफी तेजी से कम हो रही है। जिसका परिणाम हम जलवायु में हो रहे अचानक परिवर्तन से देख पा रहे है। लेकिन, इंसान अभी भी इन वनों के महत्व को समझ नहीं रहा है और अभी भी वनों को काट रहा है।

हम सभी को वनों के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है और वनों की कटाई को रोकने या फिर कम करने की आवश्यकता है। हमसे जितना हो सके, हमें नए पेड़ लगाने चाहिए।

अंतिम शब्द

अंत में आशा करता हूँ कि यह लेख आपको पसंद आया होगा और आपको हमारे द्वारा इस लेख में प्रदान की गई अमूल्य जानकारी फायदेमंद साबित हुई होगी।

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