हाथी पर निबंध

Essay on Elephant in Hindi

हाथी पर निबंध : Essay on Elephant in Hindi:- आज के इस लेख में हमनें ‘हाथी पर निबंध’ से सम्बंधित जानकारी प्रदान की है।

यदि आप हाथी पर निबंध से सम्बंधित जानकारी खोज रहे है? तो इस लेख को शुरुआत से अंत तक अवश्य पढ़े। तो चलिए शुरू करते है:-

हाथी पर छोटे तथा बड़े निबंध : Long & Short Essay on Elephant in Hindi [Hathi Par Nibandh Hindi Mein]

निबंध 1 (500 शब्द)

प्रस्तावना:-

हाथी एक बड़े शरीर वाले जानवरों में से एक है। इसका रंग आमतौर पर स्लेटी होता है। यह जानवर पालतू व जंगली दोनों तरह के होते है।

पालतू बनाने के लिए इन्हें सही प्रशिक्षण देने की आवश्यकता होती है। हाथी एक शाखाहारी जीव होता है और यें ज्यादातर झुण्ड बनाकर ही रहते है।

राजा-महाराजाओं के समय से ही हाथी का प्रयोग किया जाता है इसलिए, इसे एक शाही जानवर भी कहा जाता है।

हाथी की सरंचना:-

हाथी का आकार 10 फीट से भी अधिक होता है। इसके आकार के साथ-साथ इसका वजन भी काफी अधिक होता है। शेष जानवरों की भांति इसके भी चार पैर होते है, जो कि काफी मोटे होते है।

इसकी एक छोटी पूँछ भी होती है। इसके बड़े-बड़े दो कान और दो छोटी आँखें भी होती है। सभी जानवरों से अलग इसकी एक लम्बी सूंड भी होती है।

इसके दो बड़े-बड़े दाँत भी होते है लेकिन, यें दाँत सिर्फ दिखावे के लिए ही होते है। उसके खाने के दाँत अलग होते है।

हाथी का भोजन:-

जंगल में रहने वाले हाथी घांस-फुंस, पेड़ों की पत्तियां, फल-फूल आदि खाते है और पालतू हाथी रोटी, घास, गन्ना एवं फल खाता है।

यह जानवर पूर्ण रूप से शाकाहारी जीव होता है। इसका बड़ा आकार होने के कारण इसका खाना भी काफी अधिक होता है।

हाथी का उपयोग:-

हाथी बहुत ही उपयोगी जीव होता है यह न सिर्फ जीवित होने पर बल्कि मृत्यु के बाद भी काफी उपयोगी साबित होता है। कईं लोग इसका उपयोग बोझ ढोने के लिए भी करते है।

इसके अतिरिक्त इसका उपयोग सर्कस में खेल दिखाने के लिए भी किया जाता है। पहले के समय में राजा-महाराजा शिकार पर जाने या फिर युद्ध में लड़ने के लिए हाथी का उपयोग किया करते थे।

मृत्यु के बाद भी इसका उपयोग किया जाता है। जब हाथी मर जाता है, तो इसके बड़े दांतों और हड्डियों को निकालकर दवाई बनाई जाती है और इससे कईं सजावटी वस्तुएँ भी बनाई जाती है।

इसकी त्वचा का भी उपयोग किया जाता है। इसकी कालाबाजारी भी काफी अधिक होती है क्योंकि, हाथी के दाँत काफी महंगे दामों में बेचे एवं ख़रीदे जाते है।

हाथी का स्वभाव:-

हाथी बड़ा ही शांत स्वभाव का जीव होता है लेकिन, गुस्सा आने पर यह काफी खतरनाक हो जाता है। गुस्से में कभी भी हाथी के पास नहीं जाना चाहिए क्योंकि, यह गुस्से में किसी को भी जान से मार सकता है और यह फसलों को भी बर्बाद कर देता है।

यह काफी समझदार और वफादार भी होता है। गुस्से के बिना हाथी का स्वभाव काफी अच्छा होता है। हाथी ऐसे ही कभी भी गुस्सा नहीं होता है। जब इसे कोई परेशान करता है, तभी यह गुस्सा होता है।

उपसंहार:-

हाथी एक विशालकाय जानवर है। मनुष्य इसका उपयोग अपने कार्य के लिए भी करता है। यह लगभग 100 वर्षों तक जीवित रहता है।

यह काफी समझदार जीव होता है। इन्हें सिखाना बहुत आसान होता है क्योंकि, इसके सीखने की क्षमता काफी अच्छी होती है।

इसे लोग सवारी के लिए भी उपयोग करते है। प्रशिक्षित करने के बाद हाथी कईं कार्य कर सकता है। इसके बड़े आकार के कारण लोग इसका उपयोग सामान ढोने के लिए भी करते है।

यह खाना खाने के लिए अपनी सूंड का प्रयोग करता है। सूंड के द्वारा ही यह खाना-पानी उठाकर अपने मुँह में डालता है। मुख्य रूप से हाथी दो प्रकार के होते है:- एशियाई हाथी और अफ्रीकन हाथी

निबंध 2 (600 शब्द)

प्रस्तावना:-

इस प्रकृति में बहुत से जीव-जंतु मौजूद है, जो इस प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में अपनी अहम भूमिका निभाते है। इनमें से कुछ जीव-जंतु तो बहुत छोटे होते है और कुछ बहुत बड़े होते है।

कुछ जीव-जंतु शाकाहारी होते है तो कुछ मांसाहारी होते है। कुछ जीव-जंतु पालतू होते है, तो कुछ जंगल में रहना पसंद करते है।

इन्हीं में से एक विशालकाय जानवर है, जिसका नाम हाथी है। हाथी एक ऐसा जानवर है, जो जंगल मे भी रहता है और मनुष्यों द्वारा पाला भी जाता है। हाथी एक बहुत ही विशाल स्तनधारी जानवर है।

हाथी की शारीरिक संरचना:-

हाथी जमीन पर रहने वाले पशुओं में सबसे बड़ा पशु है। इसकी चमड़ी बहुत मोटी व काफी संवेदनशील होती है। यह कम से कम 1 इंच तक मोटी होती है।

इसका शरीर गहरी स्लेटी रंग का होता है। यह मुख्य रुप से 2 रंगों में पाया जाता है। यह मुख्य रूप से स्लेटी रंग का होता है। लेकिन, कईं जगहों पर सफेद हाथी भी पाए जाते है।

हाथी के पास उसकी सबसे मददगार सूंड होती है, जो उसके लिए भोजन खाने, सांस लेने व भारी सामान उठाने में मददगार साबित होती है।

इसके माध्यम से वह फर्श पर पड़े एक छोटे से सिक्के को भी उठा सकता है। उसकी सूंड ऊपरी होंठ व नाक के साथ सीधे जुड़ी होती है।

हाथी का कुल वजन 1 हजार किलोग्राम तक होता है। कुछ बड़े हाथी 32 हजार किलोग्राम तक हो सकते है। इतना भारी भरकम शरीर को संभालने के लिए इसके पास 4 मजबूत टांगे होती है।

इसके पास 2 कान, 2 आंख व एक पूँछ होती है। हाथी के पास 2 दांत भी होते है, जो उम्र भर बढ़ते रहते है। हाथी एकमात्र ऐसा जानवर है, जिसके 4 घुटने होते है।

वह खड़े होकर ही सोता है। एक मादा हाथी 4 वर्ष के समय अंतराल में एक बच्चे को जन्म दे सकती है। औसतन इसका गर्भकाल 22 माह का होता है।

इसमें 1 प्रतिशत से भी कम माममों में वह 2 बच्चों को जन्म देती है। एक नए जन्में हाथी की लंबाई 83 सेंटीमीटर तक व इसका वजन 112 किलोग्राम तक होता है।

हाथी के कान बाकी शरीर के मुकाबले सबसे मुलायम होते है। जिसे क्नल (Knule) कहा जाता है। इसकी मदद से ही महंत हाथी को निर्देश देता है। हाथी का दिमाग सभी जानवरो में सबसे बड़ा होता है।

अफ्रीकी हाथियों की लंबाई 13 फुट तक होती है जबकि, भारतीय हाथियों की लंबाई 10 फीट तक होती है। हाथी कभी भी 3 पैरों को हवा में नही रख सकता है व न ही हाथी कूद सकता है।

हाथी का भोजन:-

हाथी मुख्य रूप से एक शाकाहारी जानवर है। वह पेड़-पौधों को खाकर अपना पेट भरता है। हाथी को एक दिन में कम से कम 100 किलोग्राम तक हरा चारा दिया जाता है।

इसके साथ ही उसे 150 किलोग्राम ट्री फॉडर व 150 किलोग्राम सूखा चारा तक दिया जाता है। सर्दी के दिनों में हाथी को गन्ने दिए जाते है।

सर्दी के दिनों में हाथी कम से कम 276 किलोग्राम तक गन्ना खा जाता है। इसके साथ ही एक हाथी को गेहूं, चावल, बाजरा, गुड़, नमक, तेल और हल्दी से मिलाकर बनाई गई खिचड़ी भी दी जाती है।

हाथी एक दिन में अपने वजन से 4 से 5 फीसदी अधिक भोजन करता है अर्थात 200 किलोग्राम तक भोजन कर सकता है व 190 लीटर तक पानी पीता है।

एक जंगली हाथी पेड़ों की टहनियां, भूंसा, पत्तियां व जंगली फल खाता है। जबकि, पालतू हाथी रोटियां, खिचड़ी, केले व गन्ने आदि खाता है।

हाथी की प्रजातियाँ:-

वर्तमान समय मे हाथी सबसे बड़े स्थलीय जीव है। वर्तमान में इसकी 2 प्रजातियाँ इस विश्व में मौजूद है। जिसमें पहली प्रजाति का नाम ऍलिफ़्स व दूसरी प्रजाति का नाम लॉक्सोडॉण्टा है।

पहले इसकी एक प्रजाति और हुआ करती थी, जिसका नाम मॅमथस था। इस प्रजाति के हाथी वर्तमान प्रजाति के हाथियों से भी बड़े हुआ करते थे। लेकिन, हाथी की यह प्रजाति अब पूरी तरह विलुप्त हो चुकी है।

अभी इसकी दोनों प्रजातियों में से ऍलिफ्स मुख्यतः अफ्रीका में व लॉक्सोडॉण्टा भारतीय प्रायदीप मे पाई जाती है। कईं खोजों में मिले जीवाश्मों से पता चला है कि हाथी की 170 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती थी।

ऑस्ट्रेलिया और अंर्टाकटिका महाद्वीपों को छोड़कर सभी महाद्वीपों पर हाथियों के जीवाश्म मिले है।

हाथियों का जीवनकाल 70 वर्ष तक का होता है। एक नर हाथी 12 से 15 वर्ष तक अपने झुंड के साथ रहता है और उसके बाद वह झुंड छोड़ देता है।

हाथी कहाँ-कहाँ पाए जाते है?:-

हाथी मुख्य रूप से अफ्रीका महाद्वीप व भारतीय महाद्वीप में पाए जाते है। वहीं भारत मे सबसे अधिक हाथी मानस उद्यान में पाए जाते है।

इसके साथ ही असम के काजीरंगा कार्बी आंगलोंग में भी हाथी पाए जाते है। भारत के 29 राज्यों में से 22 राज्यों में हाथी पाए जाते है। इनमें झारखंड, कर्नाटक, केरल, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में हाथी अधिक मात्रा में पाए जाते है।

हाथियों के लिए ख़तरा:-

आज हाथियों की संख्या लगातार घटती जा रही है। इसका प्रमुख कारण लगातार हो रहा हाथियों का शिकार है।

आज हाथी के दांत की कीमत लाखों रुपयों में है। इसलिए, हाथी को मारकर हाथी के दांतों को गैरकानूनी तरीकों से बेचा जाता है। जिससे लगातार हाथियों की संख्या में कमी आ रही है।

इसके साथ ही इसका दूसरा कारण है कि हाथी एक विशालकाय जानवर है। उसे अपने भोजन के लिए बड़ी दूर जाना पड़ता है। इतने बड़े जानवर को भोजन की कमी होना तय है।

हाथियों का संरक्षण:-

आज सरकार भी हाथियों के संरक्षण के लिए कईं कदम उठा रही है। हाथियों के संरक्षण के लिए राज्य सरकारों ने प्रोजेक्ट एलीफैंट के जरिये हाथी बाहुल्य क्षेत्र के नोटिफिकेशन जारी किए।

जिसके कारण उन क्षेत्रों को एलीफैंट रिजर्व के रूप में चिन्हित किया गया है। इसके लिए मुख्यतः राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव विहार, रिजर्व फॉरेस्ट, सामुदायिक वन जैसे क्षेत्रो को चुना गया।

हाथी छोटे वनों में 60 प्रतिशत समय बिताते हैं। इसलिए, उन्हें भी संरक्षित किया जा रहा है। इसके लिए हाथियों का एक कॉरिडोर बनाया गया है।

उपसंहार:-

हाथी एक बहुत ही समझदार व भावनाओं से भरा प्राणी है। कई बार उसे अपने करीबी की मृत्यु पर रोते हुए देखा गया है। हाथी मनुष्यों के साथ रहना पसंद करता है।

मानाजाता है कि उसे मनुष्य किसी प्यारे जानवर के जैसे लगते है। प्राचीन समय में हाथियों का उपयोग युद्धों में भी किया जाता था। इसलिए, इसे शाही जानवर भी कहा जाता है।

हिन्दू सभ्यता में हाथी का बहुत अधिक महत्व है। उसे पूज्य माना जाता है। आज हाथियों की संख्या लगातार घटती जा रही है।

जिसके लिए आवश्यक कदम उठाना बहुत जरूरी है। हाथी जैसा जानवर मनुष्य के बहुत अधिक काम आता है। इसलिए, इसकी रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है।

अंतिम शब्द

अंत में आशा करता हूँ कि यह लेख आपको पसंद आया होगा और आपको हमारे द्वारा इस लेख में प्रदान की गई अमूल्य जानकारी फायदेमंद साबित हुई होगी।

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