भ्रष्टाचार पर भाषण

Speech on Corruption in Hindi

भ्रष्टाचार पर भाषण : Speech on Corruption in Hindi:- आज के इस लेख में हमनें ‘भ्रष्टाचार पर भाषण’ से सम्बंधित जानकारी प्रदान की है।

यदि आप भ्रष्टाचार पर भाषण से सम्बंधित जानकारी खोज रहे है? तो इस लेख को शुरुआत से अंत तक अवश्य पढ़े। तो चलिए शुरू करते है:-

भ्रष्टाचार पर भाषण : Speech on Corruption in Hindi

भाषण 1

नमस्कार, आदरणीय प्रधानाचार्य जी, माननीय अतिथिगण, सभी शिक्षक व मेरे सभी साथियों को मेरा प्यारभरा नमस्कार।

मेरा नाम — है। मैं इस विद्यालय में 12वीं कक्षा का विद्यार्थी हूँ। आज हम सभी यहाँ पर एक खास उपलक्ष के लिए एकत्रित हुए है।

आज मैं आप सभी के सामने भ्रष्टाचार पर भाषण देने जा रहा हूँ। मैं इसके लिए आप सभी का शुक्रगुजार हूँ कि आप सभी ने मुझे इस मंच पर भाषण देने का अवसर प्रदान किया।

हम भारत के नागरिक है और हमें इस अपनी नागरिकता पर बहुत गर्व है। हम सभी यह चाहते है कि हमारा देश हर क्षेत्र में तरक्की करें।

किसी भी देश को तरक्की करने के लिए उसके सभी सरकारी व निजी विभागों का सही प्रकार से काम करना अत्यंत आवश्यक है।

तभी देश को तरक्की की राह पर ले जाया जा सकता है। लेकिन, वर्तमान समय में भ्रष्टाचार ने इसमें अपने पैर पूरी तरह पसार लिए है।

भ्रष्टाचार का अर्थ होता है:- वह आचरण जो किसी भी तरीके से अनैतिक व गलत हो, वह भ्रष्टाचार कहलाता है। आज भारत के हर विभाग में भ्रष्टाचार फैल चूका है।

भ्रष्टाचार एक वायरस की तरह है, जो पूरी व्यवस्था में पूरी तरह से घुस चूका है। आज के समय में आप बिना रिस्वत दिए अपना कोई काम नहीं करवा सकते है।

आज रोड़ पर खड़ा रहने वाला हवलदार हो या एक बड़े पद पर बैठने वाला अफसर, किसी को भी घुस लेने में कोई तकलीफ नहीं है।

समय-समय पर आईएएस व आईपीएस अफसरों के घूस लेने की ख़बरें भी सामने आती रहती है। इसमें अफसरों के साथ-साथ बड़े बड़े नेता भी शामिल होते है।

यदि किसी भी देश के इतने ऊंचे पदों पर बैठे लोग अगर भ्रष्टाचार करेंगे, तो देश कैसे तरक्की कर पाएगा?

वर्तमान समय में यदि आपको कोई गलत काम भी करना हो, तो आप पैसे की सहायता से उसे आसानी से कर सकते है। आजकल सरकारी नौकरियों को भी पैसे में बेचा जा रहा है।

जिससे प्रतिभावान लोगों को नौकरियां नहीं मिल पा रही है। जिससे देश का उचित विकास नहीं हो पा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में भी यह बहुत अधिक मात्रा में फैल गया है।

आज निजी संस्थानों ने इस क्षेत्र में अपने पैर पसार लिए है। सरकारी विद्यालयों में छात्रों को उचित शिक्षा नहीं दी जा रही है। जिससे मजबुरन बच्चों को निजी संस्थानों में पढ़ना पड़ता है।

जिस कारण वे मनचाहा शुल्क लेकर उन्हें दाखिला प्रदान करते है। इसी तरह हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार फैल रहा है।

भ्रष्टाचार के कारण आज अमीर व्यक्ति और अधिक अमीर तथा गरीब व्यक्ति और अधिक अधिक गरीब हो गया है।

जिससे इनके बीच की खाई लगातार बढ़ रही है। भारत आज विश्व में भ्रष्टाचार के मामले में 176 देशों की सूची में 94वें स्थान पर है।

वर्तमान समय में सरकार भी इससे निपटने के लिए काफ़ी कड़े कदम उठा रही है। सरकार ने भ्रष्टाचार में लिप्त बहुत से अफसरों को पकड़ा है और उन्हें उचित सजा दी है।

आज सरकार ने सभी कार्यों को ऑनलाइन कर दिया है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है। सरकार ने RTI नाम का एक कानून बनाया है।

जिसके माध्यम से आप सरकार से किसी भी मुद्दे पर प्रश्न पूछ सकते है। इसको रोकने के लिए सरकार अकेले कुछ नहीं कर सकती है।

हम सभी को भी इस मुद्दे पर सरकार का साथ देना होगा। हमें अपना काम निकलवाने के लिए किसी को अधिक पैसे देने की आवश्यकता नहीं है।

यदि कहीं चालान देने की बात हो, तो हम कुछ रूपए देकर न छूटे बल्कि चालान कटवाएं। इन सभी तरीकों से इसे काफी हद तक कम किया जा सकता है। अतः मैं अपने भाषण को समाप्त करने जा रहा हूँ।

धन्यवाद!

भाषण 2

सुप्रभात, आदरणीय प्रधानाचार्य जी, माननीय शिक्षकगण, सभी आदरणीय अतिथिगण एवं मेरे प्यारे साथियों, आप सभी को मेरा प्यारभरा नमस्कार।

जैसा कि आप सभी जानते है कि हम सभी इस विद्यालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में एकत्रित हुए है। जिसमें मैं आप सभी का तहदिल से स्वागत करता हूँ।

सर्वप्रथम, मैं आप सभी को धन्यवाद देना चाहता हूँ कि आपने मुझे इस मंच पर अपने विचार व्यक्त करने का अवसर प्रदान किया।

आज इस अवसर पर मैं देश में बढ़ने वाली एक ऐसी बीमारी के बारे अपने विचार व्यक्त करना चाहता हूँ, जो हमारे देश को धीरे-धीरे खोखला कर रही है।

हमारे देश को खोखला करने वाली यह बीमारी है:- भ्रष्टाचार। आशा करता हूँ कि आपको मेरा यह भाषण पसंद आएगा।

भ्रष्टाचार वास्तव में एक गंभीर बीमारी की तरह है, जो धीरे-धीरे इस देश को अपाहिज बना रही है। आज भारत में भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी हो गई है।

यह हमारे देश के महान इतिहास पर एक कलंक के समान है, जो आज हमारे देश की कार्यप्रणाली को गन्दी करती जा रही है। यह लोकतंत्र पर एक काले धब्बे के समान है।

आज इस देश का प्रत्येक व्यक्ति अपने समय और मेहनत को बचाने के लिए किसी न किसी रूप में भ्रष्टाचार कर रहा है।

आज इस देश में हर व्यक्ति भ्रष्टाचार को कम करने की बात करता है लेकिन, स्वयं इससे बच नहीं पाता है।

जब किसी व्यक्ति को पुलिस चालान काटने के लिए रोकती है, तो हर व्यक्ति थोड़े लालच में आकर पुलिस वाले को रिश्वत देकर अपने पैसे बचाने का प्रयास करता है।

फिर वहीं व्यक्ति यह कहता है कि हमारे देश में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। जब तक हम ऐसी छोटी-छोटी चीजों को नहीं रोकेंगे, तब तक इस देश को भ्रष्टाचार मुक्त करवा पाना नामुकिन है।

इस देश के प्रत्येक व्यक्ति को अपने हिस्से के भ्रष्टाचार को ख़त्म करना होगा, तब जाकर ही इस देश का भ्रष्टाचार ख़त्म हो पाएगा।

सरकारी काम करने वाले व्यक्ति आम लोगों के किसी भी काम को करने के लिए रिश्वत मांगते है और रिश्वत न देने पर वें उस व्यक्ति का काम भी नहीं करते है।

तब मजबूर होकर उस व्यक्ति को रिश्वत देनी ही पड़ती है। ऐसे लोगों की वजह से ही भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। लोग अपने लालच को कम नहीं कर पा रहे है, जिससे यह देश कलंकित हो रहा है।

भ्रष्टाचार एक दीमक की तरह है, जो धीरे-धीरे लकड़ी को अंदर ही अंदर खोखला करता रहता है और बाहर पता भी नहीं चलता है।

लेकिन, वह लकड़ी धीरे-धीरे कमजोर होती रहती है और एक दिन चूर-चूर होकर गिर जाती है।

उसी प्रकार भ्रष्टाचार होता है, जो अंदर ही अंदर इस देश को ख़त्म कर रहा है लेकिन, बाहर पता भी नहीं चल रहा है।

यदि, भविष्य में भी ऐसा ही चलता रहा तो हमारे देश की हालत उस गिरी हुई लकड़ी के समान हो जाएगी।

आज हम सभी को भ्रष्टाचार के प्रति जागरूक होने की जरूरत है और कम से कम हमें अपने हिस्से में हो रहे भ्रष्टाचार को ख़त्म करना होगा।

भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कानून में सख्ती करनी होगी। ऐसे लोगो के लिए कड़े दंड निर्धारित करने होंगे, जिससे उनमें डर पैदा होगा।

क्योंकि, डर ही एकमात्र ऐसी चीज है, जो व्यक्ति को अपराध करने से रोकती है। सरकार को हर सरकारी कार्यालयों में कैमरे लगाने चाहिए।

भ्रष्टाचार करने वाले लोगों का सामाजिक तौर पर विरोध करना चाहिए। जिससे वें समाज के डर से भ्रष्टाचार छोड़ दें।

सिर्फ कहने से ही भ्रष्टाचार समाप्त नहीं होता है, इसके लिए हम सभी को आवश्यक कदम उठाने होंगे।

भ्रष्टाचार अवधारणा सूचकांक (CPI) 2021 में 180 देशों की सूची में भारत 85वें स्थान पर आया।

लेकिन, इसमें एक अच्छी बात यह है कि भारत ने पिछली बार के मुकाबले में एक स्थान में सुधार किया है।

इतना कहकर मैं अपने भाषण को समाप्त करता हूँ और आशा करता हूँ कि आपको मेरा यह भाषण पसंद आया होगा। आप सभी का इस भाषण को सुनने के लिए तहदिल से धन्यवाद!

धन्यवाद!

अंतिम शब्द

अंत में आशा करता हूँ कि यह लेख आपको पसंद आया होगा और आपको हमारे द्वारा इस लेख में प्रदान की गई अमूल्य जानकारी फायदेमंद साबित हुई होगी।

अगर इस लेख के द्वारा आपको किसी भी प्रकार की जानकारी पसंद आई हो तो, इस लेख को अपने मित्रों व परिजनों के साथ फेसबुक पर साझा अवश्य करें और हमारे वेबसाइट को सबस्क्राइब कर ले।

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